राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने 15 लोगों की जिंदगी छीन ली और कई परिवारों को हमेशा के लिए दर्द दे गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि इमारत में मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही मिनटों में पूरा भवन धुएं और लपटों से भर गया। अंदर फंसे छात्र और कर्मचारी जान बचाने के लिए हर संभव कोशिश करते रहे। किसी ने तीसरी मंजिल से छलांग लगाई तो कोई पाइप और तारों के सहारे नीचे उतरने की कोशिश करता दिखाई दिया।
“पापा, आग लग गई है… मुझे बचा लो”
हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर उन आखिरी फोन कॉल्स में सामने आई, जो आग में फंसे युवाओं ने अपने परिवार वालों को किए। आलमबाग निवासी पारिजोत सिंह ने बताया कि उनके बेटे ने आग लगने के दौरान फोन कर कहा, “पापा, आग लग गई है… मुझे बचा लो।” बेटे की घबराई हुई आवाज सुनते ही वह घटनास्थल की ओर दौड़े, लेकिन वहां पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। कुछ ही देर बाद उन्हें अपने बेटे के बारे में वह खबर मिली, जिसे कोई पिता कभी नहीं सुनना चाहता।

मदद की गुहार लगाते रहे युवा
23 वर्षीय सुखमणि सिंह ने भी दोपहर करीब 2:15 बजे अपने पिता को फोन कर बताया कि ऑफिस में आग लग गई है और उन्हें बचाने की गुहार लगाई। पिता तुरंत मौके के लिए रवाना हुए, लेकिन तब तक हालात बेहद खराब हो चुके थे। वहीं 25 वर्षीय आदित्य, जो एक एनिमेशन स्टूडियो में काम करता था, उसने भी अपने दोस्त को फोन कर मदद मांगी। दोस्त जब तक घटनास्थल पहुंचा, तब तक पूरी इमारत धुएं से भर चुकी थी। आदित्य की मां ने रोते हुए कहा कि यदि समय रहते राहत और बचाव कार्य शुरू हो जाता तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
कई परिवारों का इकलौता सहारा छिन गया
इस हादसे ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। मृतकों में शामिल अब्दुल रहमान अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसके दोस्त सद्दाम शेख ने बताया कि अब्दुल के पिता लकवाग्रस्त हैं और मां गृहिणी हैं। करीब आठ-दस महीने पहले ही उसे नौकरी मिली थी और वह अपने परिवार के बेहतर भविष्य के सपने देख रहा था। उसकी दो बहनों की शादी हो चुकी है और अब माता-पिता के सामने जीवनयापन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ 15 लोगों की जान ली, बल्कि कई परिवारों से उनका सहारा भी छीन लिया।

