उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों Om Prakash Rajbhar के उस दावे को लेकर चर्चा तेज है, जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने की बात कही है। राजभर के लगातार बयानों के बाद अब समाजवादी पार्टी के सांसद Rajeev Rai ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और उनके दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
“बलिया के लाल हम हैं, राजभर को लाल कर देंगे”
राजीव राय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ओम प्रकाश राजभर मानसिक रूप से विचलित हो गए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग पहले भाजपा नेताओं को लेकर बयान देते रहे हैं, वे अब ब्राह्मण समाज की चिंता कर रहे हैं। सपा सांसद ने कहा, “बलिया के लाल राजीव राय और Sanatan Pandey हैं, और दोनों मिलकर उन्हें लाल कर देंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि उनकी सनातन पांडे से भी बातचीत हुई है और पार्टी में किसी तरह की नाराजगी या टूट की कोई संभावना नहीं है। राजीव राय ने कटाक्ष करते हुए कहा कि राजभर और उनके परिवार को किसी अच्छे मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज की जरूरत है।
लोकसभा चुनाव का भी किया जिक्र
सपा सांसद ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने राजभर और उनके परिवार को “बकबकाइटिस” नाम की बीमारी से पीड़ित बताया था। उनके मुताबिक, राजभर लगातार बिना तथ्यों के बयान देकर राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद जैसे मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए किया जा रहा है।

क्या बोले थे ओपी राजभर?
दरअसल, पिछले कई दिनों से ओम प्रकाश राजभर लगातार दावा कर रहे हैं कि समाजवादी पार्टी में जल्द ही बड़ी टूट होगी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि सपा के बागी सांसदों के समूह का नेतृत्व उत्तर प्रदेश की “बागी भूमि” बलिया का एक नेता करेगा।
राजभर ने यह भी आरोप लगाया था कि हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज का अपमान हुआ, जिससे कई नेता नाराज हैं। उन्होंने दावा किया कि यह नाराजगी आने वाले दिनों में पार्टी में बड़े राजनीतिक बदलाव का कारण बन सकती है।
सपा ने दावों को बताया निराधार
समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और राजभर के बयान केवल राजनीतिक सुर्खियां बटोरने के लिए दिए जा रहे हैं। फिलहाल सपा नेतृत्व की ओर से किसी भी संभावित टूट या बगावत के संकेत नहीं मिले हैं। ऐसे में राजभर और सपा नेताओं के बीच बयानबाजी का यह दौर उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।

