हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र जिले के गांव उमरी में ‘हरियाणा राजस्व प्रशिक्षण अकादमी’ की स्थापना को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय राज्य के राजस्व प्रशासन को मजबूत बनाने और अधिकारियों की क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का मानना है कि बदलते समय में राजस्व प्रणाली को अधिक तकनीकी और दक्ष बनाना बेहद जरूरी है।
100 करोड़ की लागत से विकसित होगी अकादमी
यह महत्वाकांक्षी परियोजना लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से 14 एकड़ भूमि पर विकसित की जाएगी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने इस योजना को स्वीकृति प्रदान की है। यह अकादमी राज्य के राजस्व अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र के रूप में काम करेगी। इसका उद्देश्य भूमि प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी नई चुनौतियों के लिए अधिकारियों को तैयार करना है।

अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने पर रहेगा फोकस
राजस्व मंत्री विपुल गोयल ने बताया कि यह अकादमी अधिकारियों की पेशेवर दक्षता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसमें भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और जनसेवा वितरण जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस परियोजना को हरियाणा बजट 2026-27 में शामिल किया गया था। सरकार का लक्ष्य है कि अधिकारियों को बदलते प्रशासनिक ढांचे के अनुरूप तैयार किया जाए ताकि जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकें।
उमरी गांव बनेगा उत्कृष्टता का नया केंद्र
अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि उमरी गांव का चयन इसके रणनीतिक स्थान को देखते हुए किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण यह स्थान पूरे हरियाणा और पड़ोसी राज्यों से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करता है। यह अकादमी भविष्य में एक ‘उत्कृष्टता केंद्र’ के रूप में विकसित होगी, जहां आधुनिक प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान के माध्यम से प्रशासनिक क्षमता को नई दिशा दी जाएगी।

