पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना राज्य में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए एक मजबूत स्वास्थ्य सुरक्षा कवच के रूप में उभर रही है। इस योजना के तहत 25 मई तक 5300 से अधिक उच्च जोखिम वाले सीजेरियन प्रसव और करीब 2000 नवजात देखभाल मामलों का कैशलेस इलाज किया गया है। इसका सीधा लाभ यह हुआ है कि जरूरतमंद परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है और समय पर इलाज सुनिश्चित हुआ है।
लाखों पंजीकरण और बढ़ता जनविश्वास
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस योजना में अब तक लगभग 44.8 लाख लोग पंजीकरण करा चुके हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि लोगों का भरोसा इस योजना पर लगातार बढ़ रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार भारत में हर दो गर्भधारण में से एक उच्च जोखिम वाला होता है, जिससे माताओं और नवजातों के जीवन पर खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है।

मरीजों की कहानियों से समझिए योजना का असर
पटियाला की दीपिका नामक महिला ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया और अन्य जटिलताओं के बावजूद उनका इलाज सेहत कार्ड के जरिए पूरी तरह कैशलेस हुआ। उनके पति ने कहा कि बिना किसी आर्थिक तनाव के सर्जरी सफल रही। वहीं दीक्षा सोनकर ने बताया कि तीसरे बच्चे के जन्म के समय उन्हें समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिली और पूरा खर्च सरकार ने वहन किया, जिससे परिवार को बड़ी राहत मिली।
नवजात देखभाल में भी दिख रहा बड़ा सुधार
इस योजना के तहत केवल मातृ स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि नवजात शिशुओं की देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2094 नवजातों को अलग-अलग स्तर की चिकित्सा सुविधा मिली है। इनमें से कुछ को बुनियादी देखभाल, कुछ को आईसीयू सुविधा और गंभीर मामलों में वेंटिलेटर सपोर्ट तक उपलब्ध कराया गया। गंभीर रूप से बीमार और समय से पहले जन्मे शिशुओं का भी सफल इलाज हुआ है, जिससे राज्य में नवजात मृत्यु दर को कम करने में मदद मिल रही है।

