देश के वरिष्ठ राजनेता और समाजसेवी Bhagat Singh Koshyari को सोमवार को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया जाएगा। नई दिल्ली स्थित Rashtrapati Bhavan में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति Droupadi Murmu उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी। इस खबर के सामने आते ही उत्तराखंड और महाराष्ट्र की राजनीति में खुशी की लहर दौड़ गई है। भगत दा के नाम से मशहूर कोश्यारी लंबे समय से सामाजिक जीवन और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े रहे हैं। शिक्षा पत्रकारिता और राजनीति में उनके योगदान को देखते हुए यह सम्मान बेहद खास माना जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का सम्मान नहीं बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति और संघर्षशील राजनीति की भी बड़ी पहचान है।
शिक्षा और समाज सेवा से शुरू हुआ सफर
Bhagat Singh Koshyari ने अपने जीवन की शुरुआत समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र से की थी। वर्ष 1966 में उन्होंने खुद को पूरी तरह शिक्षा और सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया था। पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना उनके जीवन का बड़ा कदम माना जाता है। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक Rashtriya Swayamsevak Sangh में विभाग कार्यवाह के रूप में काम किया। समाज और राष्ट्र के मुद्दों को लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने हिंदी साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन भी शुरू किया। आपातकाल के दौरान उनकी सक्रियता के कारण उन्हें मीसा कानून के तहत गिरफ्तार भी किया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोश्यारी का जीवन संघर्ष और अनुशासन की मिसाल रहा है जिसने उन्हें जनता के बीच अलग पहचान दिलाई।

उत्तराखंड राजनीति में निभाई बड़ी भूमिका
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद Bhagat Singh Koshyari ने राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाई। वह अंतरिम सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और बाद में उत्तरांचल यानी वर्तमान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रहे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में भी उन्होंने मजबूत भूमिका निभाई। वर्ष 2008 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया और 2014 में वह नैनीताल-ऊधम सिंह नगर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। राजनीति में उनकी सादगी और संगठन क्षमता हमेशा चर्चा में रही। समर्थकों का कहना है कि उन्होंने हमेशा पहाड़ के विकास और आम लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता दी। यही वजह है कि आज भी उत्तराखंड में उन्हें बेहद सम्मान के साथ याद किया जाता है।
महाराष्ट्र के राज्यपाल से पद्मभूषण तक का सफर
पांच सितंबर 2019 को Bhagat Singh Koshyari को Maharashtra का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। इसके साथ अगस्त 2020 में उन्हें Goa के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई संवैधानिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना किया। अब पद्मभूषण सम्मान मिलने से उनके लंबे सार्वजनिक जीवन को नई पहचान मिली है। राजनीतिक गलियारों में इसे राष्ट्र सेवा और जनसमर्पण की बड़ी स्वीकृति माना जा रहा है। समारोह को लेकर उनके समर्थकों और उत्तराखंड के लोगों में खास उत्साह दिखाई दे रहा है। कई नेताओं ने इसे उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण बताया है।

