पंजाब सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। इसी कड़ी में Bhagwant Mann सरकार ने सरकारी स्कूलों के 72 अध्यापकों के तीसरे और अब तक के सबसे बड़े बैच को फिनलैंड के लिए रवाना किया। चंडीगढ़ से मुख्यमंत्री ने इस बैच को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जबकि इस मौके पर शिक्षा मंत्री Harjot Singh Bains भी मौजूद रहे। यह सभी शिक्षक फिनलैंड की टुरकू यूनिवर्सिटी में 15 दिनों की आधुनिक शिक्षण तकनीक, स्मार्ट क्लासरूम मैनेजमेंट और विश्वस्तरीय शिक्षा प्रणाली की ट्रेनिंग लेंगे। सरकार का दावा है कि यह कदम पंजाब की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने में मील का पत्थर साबित होगा।
शिक्षकों को बताया राष्ट्र निर्माण की रीढ़, सीएम मान का बड़ा बयान
रवाना करने के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने वाले नहीं बल्कि देश के निर्माण की असली नींव होते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार शिक्षा को केवल सुधार नहीं बल्कि पूरी तरह से नया स्वरूप देने के मिशन पर काम कर रही है। सीएम मान ने यह भी बताया कि पिछले बैचों में गए शिक्षकों की ट्रेनिंग के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और बोर्ड परीक्षाओं में 96 से 98 प्रतिशत तक अंक हासिल कर रहे हैं। यहां तक कि तीन छात्राओं ने 12वीं में 500 में से पूरे 500 अंक प्राप्त कर राज्य का नाम रोशन किया है।

फिनलैंड ट्रेनिंग से अब 216 शिक्षक बनेंगे मास्टर ट्रेनर
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि इस नए बैच के बाद फिनलैंड में ट्रेनिंग प्राप्त करने वाले शिक्षकों की कुल संख्या 216 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार केवल इमारतों पर नहीं बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान दे रही है। इससे पहले 144 शिक्षक फिनलैंड, 234 प्रिंसिपल सिंगापुर और 199 हेडमास्टर्स आईआईएम अहमदाबाद में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। सरकार की योजना है कि ये प्रशिक्षित शिक्षक लौटकर “मास्टर ट्रेनर” की भूमिका निभाएं और अन्य शिक्षकों को भी आधुनिक शिक्षण तकनीक सिखाएं, जिससे पूरे राज्य की शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार हो सके।
सरकारी स्कूलों में आधुनिक सुविधाओं से बदल रहा शिक्षा का स्वरूप
पंजाब सरकार के अनुसार राज्य के सरकारी स्कूलों में अब तेजी से आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। लगभग 99 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध कराए जा चुके हैं और अधिकांश स्कूलों में बिजली की सुविधा सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही पैरेंट-टीचर मीटिंग्स के जरिए अभिभावकों की भागीदारी भी बढ़ी है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। फिनलैंड जा रहे शिक्षकों में भी उत्साह देखने को मिला, जिन्होंने कहा कि वे वहां से नई तकनीक सीखकर पंजाब के बच्चों को और बेहतर शिक्षा देने का प्रयास करेंगे। कुल मिलाकर राज्य में शिक्षा व्यवस्था अब केवल ढांचे तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके परिणाम और गुणवत्ता दोनों में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है।

