बिहार के गया जिले में बाराचट्टी की विधायक ज्योति मांझी के काफिले पर हुए हमले ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। रविवार को हुए इस हमले के बाद हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी बेहद नाराज दिखाई दिए। सोमवार को गयाजी में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं बल्कि अब तक का आठवां हमला है। मांझी ने साफ कहा कि अगर पुलिस चाहती तो सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता था लेकिन जानबूझकर उन्हें छोड़ा गया। उन्होंने मोहनपुर थाने के दारोगा पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि उनका रवैया अनुसूचित जाति समाज के खिलाफ है। इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों इस मामले को लेकर आमने-सामने आ गए हैं जबकि पुलिस प्रशासन पर सवाल लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
“जान से मारने की नीयत थी” बोलीं ज्योति मांझी
हमले के बाद विधायक ज्योति मांझी ने भी पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि हमलावरों की मंशा सिर्फ विरोध करना नहीं बल्कि बड़ा नुकसान पहुंचाना था। ज्योति मांझी के मुताबिक अगर वह उस समय गाड़ी से नीचे उतर जातीं तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता की सेवा के लिए होते हैं और लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है। अगर किसी को कोई नेता पसंद नहीं है तो चुनाव में नोटा का विकल्प मौजूद है लेकिन इस तरह हिंसक हमला लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है। ज्योति मांझी ने यह भी कहा कि उग्रवादियों की कोई जाति नहीं होती और ऐसे मामलों को जातीय नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बार भी उन पर आरजेडी समर्थकों द्वारा हमला किया गया था। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है।

पुलिस पर गंभीर आरोप और सात दिन का अल्टीमेटम
पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने गया पुलिस प्रशासन पर सीधे सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस की लापरवाही ने हमलावरों का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहनपुर थाने के स्तर पर पूरी साजिश रची गई और एससी-एसटी समाज की विधायक को निशाना बनाया गया। मांझी ने एसएसपी और जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सात दिनों के भीतर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे एसएसपी और डीएम आवास का घेराव करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस का रवैया निष्पक्ष नहीं दिख रहा और मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। इस बयान के बाद प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया है। दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। लेकिन अब तक किसी बड़ी गिरफ्तारी की खबर सामने नहीं आने से सवाल लगातार उठ रहे हैं।
सात नामजद समेत 20 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज
पूरे मामले में मोहनपुर थाने में सात नामजद और करीब 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। जानकारी के मुताबिक रविवार को ज्योति मांझी एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रही थीं तभी रास्ते में कुछ लोगों ने उनके काफिले को घेर लिया। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों के साथ बदसलूकी भी की गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस आरोपियों की पहचान में जुटी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है क्योंकि इसमें कानून व्यवस्था के साथ-साथ जातीय और राजनीतिक आरोप भी जुड़ गए हैं। फिलहाल पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस सात दिनों के भीतर क्या कार्रवाई करती है और सरकार इस विवाद को कैसे संभालती है।

