ममता बनर्जी के कलकत्ता हाई कोर्ट में वकीलों की पोशाक पहनकर पेश होने का मामला अब बड़ा कानूनी और राजनीतिक विवाद बन गया है। उनकी गाउन और बैंड पहने तस्वीरें सामने आने के बाद सवाल उठने लगे कि क्या उन्हें बतौर वकील अदालत में पेश होने की वैध अनुमति है। इसी विवाद के बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बीसीआई ने ममता बनर्जी के नामांकन, प्रैक्टिस और वर्तमान कानूनी स्थिति की जानकारी तलब की है।
BCI ने मांगी नामांकन और प्रैक्टिस से जुड़ी पूरी जानकारी
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपने निर्देश में कहा है कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री अदालत में आधिकारिक वकील पोशाक में दिखाई दीं, जो बार काउंसिल नियमों और प्रोफेशनल आचरण से जुड़े मानकों के तहत जांच का विषय है। बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से पूछा है कि ममता बनर्जी का एनरोलमेंट नंबर क्या है और वह कब जारी हुआ था। इसके अलावा यह भी पूछा गया है कि क्या उनका नाम अभी भी वकीलों के रजिस्टर में दर्ज है और क्या उनका सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस वर्तमान में सक्रिय है।

संवैधानिक पद पर रहने के दौरान प्रैक्टिस निलंबन पर उठे सवाल
विवाद का सबसे बड़ा कारण यह है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के मुताबिक यदि कोई वकील संवैधानिक या लाभ के पद पर नियुक्त होता है तो उसे अपनी कानूनी प्रैक्टिस निलंबित करनी होती है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि 2011 से 2026 तक मुख्यमंत्री रहने के दौरान क्या ममता बनर्जी ने अपनी प्रैक्टिस स्वेच्छा से निलंबित की थी या नहीं। बीसीआई ने यह भी पूछा है कि पद छोड़ने के बाद क्या उन्होंने दोबारा प्रैक्टिस शुरू करने के लिए कोई औपचारिक आवेदन दिया था। अब पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के जवाब के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि अदालत में उनकी मौजूदगी नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
16 मई तक मांगा जवाब, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की चेतावनी
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को 16 मई तक जवाब देने का निर्देश दिया है। साथ ही सख्त चेतावनी भी दी गई है कि रिकॉर्ड में किसी तरह की छेड़छाड़ या बदलाव नहीं किया जाए। बीसीआई ने कहा है कि जांच पूरी होने तक सभी मूल दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं और किसी प्रकार की ओवरराइटिंग या सुधार न किया जाए। इस मामले ने अब कानूनी जगत के साथ-साथ बंगाल की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है।

