समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी एक कथित विवादित बयान को लेकर राजनीतिक विवादों के घेरे में आ गए हैं। सोशल मीडिया पर उनके भाषण के कुछ हिस्सों के वायरल होने के बाद उन पर ब्राह्मण समाज के खिलाफ टिप्पणी करने के आरोप लगे। हालांकि, भाटी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और इसका उद्देश्य गलत धारणा बनाना है।
पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम में दिए गए भाषण का संदर्भ
राजकुमार भाटी के अनुसार यह पूरा मामला दिल्ली के जवाहर भवन में आयोजित एक पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम से जुड़ा है, जहां डॉ. रफरफ शकील अंसारी और जावेद अनवर की किताब ‘जाति और साम्प्रदायिकता के विषाणु’ का विमोचन हुआ था। इस कार्यक्रम में कई सामाजिक और बौद्धिक हस्तियां शामिल थीं, जिनमें योगेंद्र यादव, आशुतोष और प्रो. रतन लाल जैसे नाम भी मौजूद थे। भाटी ने बताया कि उन्होंने अपने भाषण में समाज में जाति आधारित सोच और नकारात्मक मुहावरों का जिक्र किया था।

बयान का गलत अर्थ निकाले जाने का आरोप
सपा प्रवक्ता ने दावा किया कि उनके भाषण के कुछ सेकंड के हिस्से को काटकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, जिससे गलत संदेश फैलाया गया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी जाति या समाज का अपमान करना नहीं था, बल्कि यह बताना था कि समाज में प्रचलित नकारात्मक सोच सभी वर्गों को प्रभावित करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने ब्राह्मण समाज को हमेशा सम्मान की दृष्टि से देखा है और उनके खिलाफ कोई दुर्भावना नहीं रखी।
बिना शर्त माफी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
विवाद बढ़ने के बाद राजकुमार भाटी ने कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे बिना शर्त माफी मांगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की आईटी सेल उनके बयान को गलत तरीके से पेश कर माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है। भाटी ने कहा कि समाजवादी विचारधारा किसी भी जाति या धर्म के अपमान के खिलाफ है और वह हमेशा सामाजिक समरसता के पक्षधर रहे हैं।

