back to top
Tuesday, July 21, 2026
Homeराजनीतिबिहार में सम्राट चौधरी का पहला विश्वास मत विधानसभा में बड़ा राजनीतिक...

बिहार में सम्राट चौधरी का पहला विश्वास मत विधानसभा में बड़ा राजनीतिक परीक्षण

बिहार की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा दिन रहने वाला है, जब राज्य के 24वें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विधानसभा में अपनी सरकार के पक्ष में विश्वास मत पेश करेंगे। उन्होंने 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और इसके बाद यह उनका पहला बड़ा राजनीतिक परीक्षण माना जा रहा है। विधानसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होगी, जहां इस प्रस्ताव पर औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस पूरे घटनाक्रम को सत्ता स्थिरता और राजनीतिक संतुलन के दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।

सदन की कार्यवाही और विश्वास मत की प्रक्रिया

विधानसभा की शुरुआत अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के संबोधन से होगी, जिसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक पंक्ति का विश्वास प्रस्ताव पेश करेंगे। प्रस्ताव के अनुसार सदन वर्तमान मंत्रिपरिषद में अपना विश्वास व्यक्त करेगा। इसके बाद इस पर विस्तृत चर्चा होगी, जिसमें सभी दलों के नेता अपनी राय रखेंगे। सबसे पहले विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव इस प्रस्ताव पर अपना पक्ष रखेंगे, जिसके बाद अन्य दलों के प्रतिनिधि अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार संपन्न होगी।

बिहार में सम्राट चौधरी का पहला विश्वास मत विधानसभा में बड़ा राजनीतिक परीक्षण

एनडीए के मजबूत आंकड़े और विश्वास मत की संभावित स्थिति

243 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट रिक्त होने के कारण कुल 242 सदस्यों के आधार पर मतदान होगा। वर्तमान में राजग यानी एनडीए के पास कुल 201 विधायकों का समर्थन है, जिसमें भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो शामिल हैं। वहीं विपक्षी गठबंधन के पास केवल 41 सदस्य हैं, जिसमें राजद, कांग्रेस, एआईएमआईएम और वाम दल शामिल हैं। इस आंकड़े के आधार पर सरकार के विश्वास मत हासिल करने की संभावना बेहद मजबूत मानी जा रही है और माना जा रहा है कि यह प्रस्ताव ध्वनि मत से भी पारित हो सकता है।

राजनीतिक संदेश और आगे की रणनीति पर नजर

विश्वास मत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सदन को संबोधित करेंगे और अपनी सरकार की आगामी नीतियों और प्राथमिकताओं का खाका पेश करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि इस मतदान के लिए भाजपा ने व्हिप जारी नहीं किया है, जो इसे सामान्य प्रक्रिया से अलग बनाता है। बताया जा रहा है कि भाजपा के 40 से अधिक विधायक पश्चिम बंगाल चुनावी कार्यों में व्यस्त हैं, जिसके चलते उन्हें वापस बुलाया गया है। हालांकि एनडीए नेतृत्व इस पूरे विश्वास मत प्रक्रिया को किसी उत्सव के रूप में पेश नहीं करना चाहता और इसे शांतिपूर्ण तरीके से पूरा करने की रणनीति अपनाई गई है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह कदम सरकार की स्थिरता और संगठनात्मक नियंत्रण का संकेत माना जा रहा है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments