उत्तराखंड विधानसभा के बाहर गुरुवार को सियासी माहौल अचानक गर्म हो गया। कांग्रेस नेताओं ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर एक दिवसीय धरना दिया। यह प्रदर्शन सिर्फ एक औपचारिक विरोध नहीं था बल्कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने की बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं ने कहा कि अब समय आ गया है जब महिलाओं को निर्णय लेने वाली प्रक्रिया में बराबरी का अधिकार मिले।
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी से बढ़ा दबाव
धरने में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और विधायक प्रीतम सिंह भी इस आंदोलन का हिस्सा बने। सभी नेता रिस्पना पुल के पास विधानसभा के सामने धरने पर बैठे और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की। नेताओं ने साफ कहा कि अगर सरकार इस मांग को नजरअंदाज करती है तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

महिलाओं की भागीदारी पर उठे बड़े सवाल
धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया कि राज्य की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को बराबरी का हक देना सिर्फ एक सामाजिक जरूरत नहीं बल्कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए भी जरूरी है। नेताओं ने यह भी कहा कि कई राज्यों में इस दिशा में पहल हो चुकी है और उत्तराखंड को भी पीछे नहीं रहना चाहिए।
आगे की रणनीति पर कांग्रेस का संकेत
इस प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को लंबे समय तक उठाएगी। पार्टी ने कहा कि यदि विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया गया तो राज्यभर में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।

