मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार वजह परीक्षा में पूछे गए एक विवादित प्रश्न को माना जा रहा है। बीकॉम बीबीए और बीसीए तृतीय वर्ष के छात्रों की फाउंडेशन कोर्स परीक्षा के दौरान भाषा एवं संस्कृति खंड में ईश्वर की अवधारणा से जुड़ा एक प्रश्न पूछा गया। प्रश्न में “अल्लाह के सिवा दूसरा कोई नहीं है” जैसा वाक्य शामिल था। इस सवाल को लेकर कुछ छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने आपत्ति जताई और इसे संवेदनशील विषय बताते हुए विरोध दर्ज कराया। मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को तुरंत इस पर संज्ञान लेना पड़ा और जांच की प्रक्रिया शुरू की गई। इस घटना ने शिक्षा जगत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न उपयुक्त माने जाने चाहिए।
विवादित प्रश्न और दिए गए विकल्पों को लेकर बढ़ा विवाद
परीक्षा प्रश्नपत्र कोड K1041AB में पूछे गए इस सवाल के साथ चार विकल्प भी दिए गए थे। इनमें सोमेश्वर खुदा शक्तिवान और दंड देने वाला जैसे विकल्प शामिल थे। छात्रों और कुछ संगठनों का कहना है कि इस प्रकार के प्रश्न धार्मिक भावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं और परीक्षा के शैक्षणिक स्वरूप पर सवाल खड़े करते हैं। उनका मानना है कि फाउंडेशन कोर्स जैसे विषय में भाषा और संस्कृति से जुड़े प्रश्न पूछे जा सकते हैं लेकिन उन्हें संतुलित और तटस्थ होना चाहिए। इस प्रश्न को लेकर विरोध रतलाम तक पहुंचा जहां कुछ संगठनों ने इसे अनुचित बताते हुए आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के साथ ही यह मुद्दा सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के लिए समिति को सौंपा मामला
विवाद बढ़ने के बाद सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की। विश्वविद्यालय के कुलसचिव अनिल कुमार शर्मा ने बयान जारी करते हुए बताया कि ऐसे मामलों के लिए विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस में स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विवादित या अनुचित प्रश्न को परीक्षा समिति के पास भेजा जाता है जहां विषय विशेषज्ञ इसकी जांच करते हैं। इस मामले को भी समिति के पास भेज दिया गया है ताकि यह तय किया जा सके कि प्रश्न सिलेबस और शैक्षणिक मानकों के अनुरूप था या नहीं। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई
कुलसचिव के अनुसार परीक्षा समिति की सिफारिश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की त्रुटि या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित एग्जामिनर को नोटिस जारी किया जाएगा और आवश्यक अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से एक अकादमिक मामला है और इसे निष्पक्ष तरीके से जांचा जाएगा। फिलहाल समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करने में जुटी हुई है और रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि प्रश्न उचित था या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। इस पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा प्रणाली और प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया पर भी एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

