सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे की बढ़त के साथ 93.04 (अस्थायी) पर बंद हुआ। रिजर्व बैंक की हाल की पहलों को फॉरेक्स ट्रेडर्स ने पॉजिटिव माना है। इन पहलों का मकसद सट्टेबाजी पर लगाम लगाना और रुपए में उतार-चढ़ाव को कम करना था। बैंकों की नेट ओपन पोज़िशन की सीमा 100 मिलियन डॉलर तय की गई। हालांकि विदेशी पूंजी की निकासी, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक अस्थिरता रुपए पर दबाव बनाए हुए हैं।
डॉलर और कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.79 तक मजबूत हुआ। गुरुवार को रुपए ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 152 पैसे की सबसे बड़ी एक-दिन की बढ़त दर्ज की थी। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी रुपए पर दबाव डाल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ तनाव बढ़ा दिया है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने की चेतावनी दी है। वहीं, डॉलर इंडेक्स में 0.15 प्रतिशत की गिरावट रही और ब्रेंट क्रूड 107.29 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

विदेशी पूंजी और विदेशी मुद्रा भंडार
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को 9,931.13 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 27 मार्च तक 688.058 अरब डॉलर रह गया। पिछले हफ्ते यह कुल 698.346 अरब डॉलर था। विशेषज्ञों के अनुसार, रुपए और डॉलर की जोड़ी में थोड़ी देर के लिए मजबूती देखने को मिल सकती है। लेकिन वैश्विक डॉलर लिक्विडिटी, कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक स्थितियों की वजह से लंबे समय में अस्थिरता बनी रहेगी।
घरेलू इक्विटी और सेवा क्षेत्र की स्थिति
घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 787.30 अंक उछलकर 74,106.85 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 255.15 अंक बढ़कर 22,968.25 पर पहुंचा। दूसरी ओर, सेवा क्षेत्र की विकास गति मार्च में 14 महीनों में सबसे धीमी रही। HSBC इंडिया सर्विसेज PMI बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स फरवरी के 58.1 से गिरकर 57.5 पर आ गया। इससे नए कारोबार में सुस्ती और गतिविधियों में धीमी वृद्धि साफ दिखाई दी।

