वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सोने को हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। आमतौर पर जब भी दुनिया में तनाव या युद्ध की स्थिति बनती है तो निवेशक जोखिम से बचने के लिए सोने की ओर रुख करते हैं। लेकिन हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में अमेरिका इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद गोल्ड बाजार में गिरावट देखने को मिली है। यह स्थिति सामान्य धारणा के बिल्कुल विपरीत है और इसी कारण निवेशकों के बीच चिंता और हैरानी दोनों बढ़ गई हैं। बाजार विशेषज्ञ भी इस अप्रत्याशित रुझान को समझने में जुट गए हैं।
शुरुआती उछाल के बाद अचानक गिरावट
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत उस समय हुई जब युद्ध जैसी स्थिति के बाद बाजार खुला। शुरुआती दिनों में सोने की कीमतों में जोरदार उछाल देखा गया और यह रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। एमसीएक्स पर गोल्ड फ्यूचर्स में भारी बढ़त दर्ज हुई जिससे लगा कि अब कीमतें लगातार ऊपर जाएंगी। लेकिन यह तेजी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी। कुछ ही हफ्तों के भीतर बाजार का रुख बदल गया और सोने की कीमतों में लगातार गिरावट शुरू हो गई। हालात ऐसे बने कि निवेशकों को अल्प समय में ही नुकसान का सामना करना पड़ा।

डॉलर की मजबूती बनी सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतों में गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती बढ़ने से अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। भारत जैसे देशों के निवेशकों के लिए इसका सीधा असर पड़ता है क्योंकि रुपये के मुकाबले डॉलर महंगा होने पर सोने की लागत बढ़ जाती है। इस स्थिति में मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बनता है। मॉर्गन स्टेनली जैसे वैश्विक संस्थानों ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है कि डॉलर की मजबूती ने सोने की चमक को फीका कर दिया है।
ब्याज दर और लिक्विडिटी संकट ने बढ़ाया दबाव
सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे ब्याज दरों की भूमिका भी अहम रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और तेल की कीमतों में उछाल के कारण केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कम कर दिया है। ऊंची ब्याज दरों के माहौल में सोने में निवेश कम आकर्षक हो जाता है क्योंकि यह कोई नियमित रिटर्न नहीं देता। इसके अलावा शेयर बाजार में आई गिरावट ने निवेशकों पर मार्जिन कॉल का दबाव बढ़ा दिया है। नकदी की जरूरत पूरी करने के लिए निवेशक अपने सोने को बेच रहे हैं जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतों में गिरावट और तेज हो गई।

