मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब दक्षिण एशिया तक पहुंचने लगा है। ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव का सीधा असर पाकिस्तान में दिखाई दे रहा है। पहले से ही महंगाई और आर्थिक संकट से जूझ रही पाकिस्तानी जनता को एक और बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान सरकार ने देश के इतिहास में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार रात हुई इस घोषणा के बाद पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। नई कीमतें लागू होने से पहले लोग अपनी गाड़ियों में ज्यादा से ज्यादा ईंधन भरवाने के लिए पेट्रोल पंपों की ओर दौड़ पड़े। कराची, लाहौर और इस्लामाबाद जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें लग गईं और कई जगहों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा हो गई।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने 7 मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिसे देश के इतिहास में सबसे बड़ी वृद्धि माना जा रहा है। नई दरों के अनुसार अब पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 321.17 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 335.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस फैसले से ठीक 24 घंटे पहले सरकार की ओर से यह कहा गया था कि देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान के पास मौजूदा समय में केवल 26 से 28 दिनों का पेट्रोल-डीजल और करीब 10 दिनों का कच्चे तेल का स्टॉक बचा हुआ है। यही वजह है कि सरकार अब ईंधन बचाने के लिए वर्क फ्रॉम होम और स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेज जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर
पाकिस्तान में ईंधन संकट का एक बड़ा कारण मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव भी माना जा रहा है। ईरान और इजरायल के बीच जारी हमलों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंका से तेल की वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ा है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80 से 85 प्रतिशत तेल आयात करता है और इसमें सऊदी अरब तथा संयुक्त अरब अमीरात उसकी मुख्य आपूर्ति करने वाले देश हैं। ऐसे में सप्लाई चेन में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और ईंधन बाजार पर पड़ता है। इसी वजह से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
आयात पर भारी खर्च और बढ़ती मांग
आंकड़ों के अनुसार कारोबारी वर्ष 2023-24 में पाकिस्तान ने लगभग 9.05 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात किया था। दैनिक स्तर पर पाकिस्तान करीब 4,30,000 बैरल तेल आयात करता है, जबकि देश में रोजाना लगभग 5,00,000 बैरल तेल की मांग रहती है। इसका मतलब है कि मांग और आपूर्ति के बीच पहले से ही बड़ा अंतर मौजूद है। सिर्फ कच्चे तेल के आयात पर ही पाकिस्तान ने वर्ष 2024 में लगभग 5.61 बिलियन डॉलर खर्च किए, जबकि कारोबारी वर्ष 2024-25 के शुरुआती नौ महीनों में यह आंकड़ा करीब 11.94 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो पाकिस्तान में ईंधन संकट और भी गंभीर रूप ले सकता है।

