तीन दिनों की लगातार तेजी के बाद शेयर बाजार में चौथे कारोबारी दिन अचानक ब्रेक लग गया। शुरुआती बढ़त के बावजूद बैंकिंग, ऑटो, मेटल और एफएमसीजी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इससे निवेशकों को करीब 7.55 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सेंसेक्स दिन के मध्य सत्र में 1,400 अंक गिरकर 82,825 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 400 अंक गिरकर 25,400 पर बंद हुआ। बीएसई पर कुल मार्केट कैप घटकर लगभग 464 लाख करोड़ रुपये रह गया।
सबसे ज्यादा गिरावट किस सेक्टर में रही?
हैवीवेट शेयरों में बिकवाली का दबाव सबसे अधिक रहा। Reliance Industries, HDFC Bank, ICICI Bank, Kotak Mahindra Bank, Larsen & Toubro, Hindustan Unilever और ITC Limited में कमजोरी देखी गई। वहीं आईटी सेक्टर से कुछ सहारा मिला और Infosys तथा TCS के शेयरों में मामूली तेजी रही, लेकिन यह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं था। निवेशक वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए अधिक सतर्क नजर आए और जोखिम वाले एसेट से सुरक्षित निवेश विकल्पों जैसे सोना और सरकारी बॉन्ड की ओर रुख किया।

वैश्विक संकेतों का असर और एशियाई बाजारों की स्थिति
वैश्विक संकेतों का भारतीय बाजार पर सीधा असर पड़ा। एशियाई बाजारों में मजबूती देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का KOSPI लगभग तीन प्रतिशत बढ़ा, जबकि जापान का Nikkei 225 करीब एक प्रतिशत उछला। हांगकांग और चीन के बाजार चंद्र नववर्ष अवकाश के कारण बंद रहे। अमेरिकी शेयर बाजार बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे वैश्विक निवेश धारणा को समर्थन मिला। वहीं Brent Crude का भाव 0.37 प्रतिशत बढ़कर 70.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
संस्थागत निवेशक और बाजार की भविष्यवाणी
डोमेस्टिक और विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों ने बाजार में मिश्रित माहौल बनाए रखा। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) ने 1,154.34 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने 440.34 करोड़ रुपये की खरीदारी की। कुल मिलाकर वैश्विक संकेतों और संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने बाजार में कुछ सकारात्मक माहौल बनाकर गिरावट को सीमित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और घरेलू हैवीवेट शेयरों की बिकवाली मिलकर अगले कुछ दिनों तक बाजार की दिशा निर्धारित करेंगी।

