back to top
Monday, April 20, 2026
Homeमनोरंजनमलयालम सिनेमा को लगा बड़ा झटका दिग्गज संगीतकार एस पी वेंकटेश का...

मलयालम सिनेमा को लगा बड़ा झटका दिग्गज संगीतकार एस पी वेंकटेश का अचानक निधन

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के स्वर्णिम दौर को अपनी धुनों से सजाने वाले मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर एस पी वेंकटेश का 3 फरवरी 2026 को चेन्नई स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे। उनके अचानक चले जाने की खबर से न सिर्फ फिल्म जगत बल्कि संगीत प्रेमियों में भी शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के करीबी सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह एक अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी थी। वेंकटेश का नाम उन संगीतकारों में लिया जाता है जिन्होंने मलयालम सिनेमा की आत्मा को संगीत के जरिए नई पहचान दी। उनके निधन को इंडस्ट्री के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

कार्डियक अरेस्ट बनी मौत की वजह

कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि एस पी वेंकटेश की मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट रही। यह जानलेवा दौरा 3 फरवरी 2026 की सुबह और दोपहर के बीच आया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी थी या नहीं। अचानक हुई इस घटना ने उनके चाहने वालों को गहरे सदमे में डाल दिया। संगीत जगत के कई बड़े नामों ने सोशल मीडिया के जरिए शोक व्यक्त करते हुए इसे मलयालम सिनेमा के एक युग का अंत बताया।

कौन थे एस पी वेंकटेश और क्यों थे खास

एस पी वेंकटेश का जन्म 1955 में हुआ था और वे संगीतराजन नाम से भी जाने जाते थे। 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने मलयालम सिनेमा में जो योगदान दिया, वह आज भी मिसाल माना जाता है। वे मॉडर्न ऑर्केस्ट्रा और क्लासिकल साउंड के बेहतरीन संतुलन के लिए मशहूर थे। अकूस्टिक गिटार, बास गिटार और वायलिन ऑर्केस्ट्रा का उनका इस्तेमाल उनकी पहचान बन गया था। उन्होंने न सिर्फ गीतों बल्कि बैकग्राउंड स्कोर में भी नई ऊंचाइयां तय कीं। उनके संगीत में भावनाओं की गहराई और तकनीकी सटीकता दोनों साफ झलकती थीं।

मलयालम सिनेमा में अमर विरासत और अंतिम विदाई

वेंकटेश ने 1985 में फिल्म जनकीय कोडाथी से अपने करियर की शुरुआत की थी, लेकिन 1986 में आई फिल्म राजाविंते मकन से उन्हें बड़ी पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने जोशी और डेनिस जोसेफ जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया। मोहनलाल और ममूटी जैसे सुपरस्टार्स की फिल्मों में उनका संगीत आज भी याद किया जाता है। देवसुरम जैसी कल्ट क्लासिक फिल्मों में उनका बैकग्राउंड स्कोर आज भी मिसाल है। अपने करियर में उन्होंने 150 से अधिक मलयालम फिल्मों और लगभग 500 गानों को संगीत दिया। उनकी अंतिम यात्रा 4 फरवरी 2026 को अलापक्कम, चेन्नई में संपन्न हुई, जहां संगीत और फिल्म जगत की कई हस्तियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments