Stock Market News: 5 जनवरी 2026, सोमवार को भारत के घरेलू शेयर बाजार में वैश्विक घटनाक्रमों का सीधा असर देखने को मिला। अमेरिकी हमले और वेनेजुएला के राष्ट्रपति पर नियंत्रण करने की कोशिश की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कस्टम टैक्स बढ़ाने की धमकियों ने भी बाजार पर दबाव डाला। नतीजतन, सप्ताह के पहले ट्रेडिंग दिन पर S&P BSE सेंसेक्स 322.39 अंक गिरकर 85,439.62 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 भी 78.25 अंक की गिरावट के साथ 26,250.30 पर आ गया। वैश्विक स्तर पर बढ़ती राजनीतिक अनिश्चितता और व्यापार को लेकर तनाव ने निवेशकों की मनोदशा को प्रभावित किया।
कुछ स्टॉक्स ने दिखाया मजबूती का प्रदर्शन
बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ कंपनियों के शेयरों ने मजबूत पकड़ बनाए रखी। इस सूची में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स सबसे बड़ा गेनर रहा, जिसके शेयरों में 2.65 प्रतिशत की तेजी देखी गई। इसके अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर 1.62 प्रतिशत, टाटा स्टील 1.56 प्रतिशत, अल्ट्राटेक सीमेंट 1.53 प्रतिशत, और एक्सिस बैंक के शेयर 1.46 प्रतिशत बढ़े। ये कंपनियां निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प के रूप में उभरीं और इनके शेयरों की मांग बनी रही। इस तरह के मजबूत स्टॉक्स ने बाजार को कुछ हद तक संभाले रखा।
ब्लू-चिप शेयरों में भारी बिकवाली
वहीं दूसरी ओर, कई प्रमुख और बड़े ब्लू-चिप शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। सबसे ज्यादा नुकसान HDFC बैंक के शेयरों को हुआ, जो 2.35 प्रतिशत गिर गए। इसके बाद इन्फोसिस के शेयर 2.09 प्रतिशत, HCL टेक्नोलॉजीज 2.08 प्रतिशत, बजाज फाइनेंस 1.21 प्रतिशत और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) 1.17 प्रतिशत नीचे आए। इन दिग्गज कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट से पूरे बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। निवेशक वैश्विक तनाव और कस्टम टैरिफ बढ़ने की आशंकाओं के चलते सतर्क नजर आए।
वैश्विक तनाव और व्यापार अनिश्चितता का बाजार पर प्रभाव
पूरी दुनिया में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और व्यापार युद्ध की खबरों ने भारतीय शेयर बाजार को भी प्रभावित किया है। निवेशकों की मनोदशा में नकारात्मकता बनी रही क्योंकि वैश्विक व्यापार प्रतिबंधों और कस्टम शुल्क बढ़ाने की संभावनाओं ने कंपनियों की लाभप्रदता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे माहौल में बाजार में अस्थिरता देखी जाती है, और निवेशक जोखिम को लेकर सतर्क रहते हैं। आने वाले दिनों में यदि वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ तो बाजार की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। भारतीय निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने और बाजार की हर छोटी-छोटी खबर पर नजर रखने का है।

