13 अप्रैल 2026 को घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली, जिसका प्रमुख कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ा तनाव माना जा रहा है। पाकिस्तान में हुई अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फेल होने के बाद निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा और हफ्ते के पहले ही दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 702.68 अंक यानी 0.91 प्रतिशत टूटकर 76,847.57 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 207.95 अंक यानी 0.86 प्रतिशत गिरकर 23,842.65 पर बंद हुआ।
बाजार की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई, बाद में दिखी हल्की रिकवरी
सोमवार को शेयर बाजार ने लगभग 2 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की थी। शुरुआती सत्र में निवेशकों की भारी बिकवाली देखने को मिली जिससे इंडेक्स तेजी से नीचे आए। हालांकि, दिन के मध्य में कुछ रिकवरी देखने को मिली और बाजार ने थोड़ा संभलने की कोशिश की। इसके बावजूद पूरे दिन का रुझान नकारात्मक ही रहा और अंत में दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में ही बंद हुए। यह साफ संकेत है कि वैश्विक अनिश्चितता का असर भारतीय बाजार पर गहराई से पड़ा है।

सेंसेक्स और निफ्टी में ज्यादातर शेयर लाल निशान में बंद
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से सिर्फ 3 कंपनियों के शेयर ही हरे निशान में बंद हुए, जबकि बाकी 27 कंपनियों में गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह निफ्टी 50 में भी केवल 10 कंपनियों के शेयर ही तेजी के साथ बंद हुए, जबकि 39 कंपनियों में गिरावट और 1 कंपनी में कोई बदलाव नहीं देखा गया। बाजार में यह व्यापक गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी रही। खासकर बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ने पूरे इंडेक्स को नीचे खींचने का काम किया।
बड़े शेयरों में भारी दबाव, कुछ स्टॉक्स ने किया बेहतर प्रदर्शन
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में आईसीआईसीआई बैंक ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 2.04 प्रतिशत की बढ़त हासिल की। वहीं एनटीपीसी 1.54 प्रतिशत और एक्सिस बैंक 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए। दूसरी ओर मारुति सुजुकी के शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई जो 4.60 प्रतिशत टूट गए। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस और बजाज फाइनेंस जैसे दिग्गज शेयरों में भी 1 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

