पंजाबी सिंगर और रैपर शहबदीप सिंह, जिन्हें हम Sidhu Moosewala के नाम से जानते हैं, की हत्या को तीन साल से अधिक समय बीत चुका है। बावजूद इसके उनके चाहने वालों का प्यार कम नहीं हुआ। शुक्रवार शाम उनके परिवार ने उनकी एक नई गीत का टीज़र जारी किया। 5 मिनट 17 सेकंड लंबा यह वीडियो “बरोटा” नाम से उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर रिलीज़ किया गया। इस रिलीज के साथ सिद्धू मूसेवाला के मृत्युपरांत कुल 12 गाने सार्वजनिक हो चुके हैं।
रिलीज के कुछ ही मिनटों में वायरल हुआ गाना
सिद्धू मूसेवाला के जैसे अन्य गानों की तरह यह नया गाना भी बेहद तेजी से वायरल हो गया। मात्र 30 मिनट में इस वीडियो को 7 लाख से अधिक बार देखा गया। साथ ही 2.5 लाख लाइक्स और करीब 2 लाख कमेंट्स भी मिले। वीडियो की जानकारी के अनुसार इस गीत के गायक, गीतकार और संगीतकार सिद्धू मूसेवाला स्वयं हैं। वीडियो में उनके पुराने फुटेज के साथ कुछ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के द्वारा बनाए गए दृश्य भी दिखाए गए हैं। इसके अलावा गाने में सिद्धू के पिता बलकौर सिंह भी नजर आते हैं। गाने का टीज़र एक दिन पहले ही जारी किया गया था जिसे विश्वभर में 35 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं।
बड़ी बंदूकें और विशेष यादें
सिद्धू मूसेवाला के ज्यादातर गानों की तरह इस गीत में भी बड़ी-बड़ी बंदूकों को दिखाया गया है। इस बार भी गाने में बड़ी बंदूकें एक विशाल बरगद के पेड़ से लटकी हुई हैं। इस गीत की खास बात यह है कि इसमें सिद्धू पहली बार अपनी दादी जसवंत कौर को याद करते हैं। गीत के बोल “कोई नेड़े टेड़े नहीं सी खब्बी खान जमेया, हो, अम्बो जसवंटी आले पोते नाल दा…” का मतलब है कि जसवंत कौर के पोते जैसा कोई प्रतिभाशाली कहीं पैदा नहीं हुआ।
परिवार की भावुक प्रस्तुति
सिद्धू मूसेवाला का परिवार इस गीत के माध्यम से उनकी यादों को जीवित रखने की कोशिश कर रहा है। पिता बलकौर सिंह का गाने में दिखना और पुरानी यादों का समावेश यह दर्शाता है कि परिवार उनके प्रति कितना लगाव और सम्मान रखता है। यह गीत न केवल मूसेवाला के फैंस के लिए बल्कि पंजाबी संगीत प्रेमियों के लिए भी एक भावुक अनुभव है।
सिद्धू मूसेवाला की विरासत और संगीत की अमरता
सिद्धू मूसेवाला का संगीत आज भी उनके चाहने वालों के दिलों में जिन्दा है। उनकी मृत्यु के बाद भी उनके गीतों की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई। “बरोटा” के रिलीज के साथ उनकी संगीत यात्रा आगे बढ़ती नजर आ रही है। यह साबित करता है कि एक कलाकार की कला और संगीत उसकी मौत के बाद भी अमर रह सकता है। सिद्धू के गीतों में उनके संघर्ष, यादें और पंजाबी संस्कृति की झलक मिलती है जो उनकी विरासत को सदाबहार बनाती है।

