NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है, जबकि सरकार समाधान और चर्चा के लिए तैयार है।
गिरिराज सिंह ने विपक्ष को घेरा
गुरुवार को मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि जब NEET पेपर लीक का मामला सामने आया था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को भरोसा दिलाया था। उन्होंने कहा कि दोबारा परीक्षा कराई गई, जिसमें 22-23 लाख छात्र शामिल हुए और अब प्रवेश प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
‘छात्रों के कंधे पर रखकर राजनीति हो रही’
गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार बातचीत और समाधान की बात कर रही है, लेकिन विपक्ष अपनी मांगें बार-बार बदल रहा है। उनके अनुसार, यदि उद्देश्य समाधान होता तो चर्चा के जरिए रास्ता निकाला जा सकता था।

फास्ट ट्रैक कोर्ट पर जताया भरोसा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की है और उन्हें विश्वास है कि इस पहल से दोषियों को जल्द सजा मिलेगी। उन्होंने कहा कि संवाद के माध्यम से ही किसी भी समस्या का समाधान संभव है।
ललन सिंह ने भी विपक्ष पर उठाए सवाल
जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि विपक्ष पहले संसद में चर्चा की मांग कर रहा था, लेकिन जब सरकार चर्चा के लिए तैयार हुई तो विपक्ष नई शर्तें रखने लगा। उन्होंने सवाल किया कि क्या संसद में किसी विषय पर चर्चा शर्तों के आधार पर होती है।
शाहनवाज हुसैन ने PM के फैसले का किया समर्थन
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने प्रधानमंत्री के फास्ट ट्रैक कोर्ट संबंधी ऐलान का समर्थन करते हुए कहा कि यह छात्रों और युवाओं को स्पष्ट संदेश है कि पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों को कड़ी सजा दी जाएगी और सरकार इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
NEET पेपर लीक विवाद पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। एक ओर सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट और संसद में चर्चा की बात कर रही है, वहीं विपक्ष अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और संसदीय बहस और तेज होने की संभावना है।

