देश के पूर्व उपराष्ट्रपति Jagdeep Dhankhar इन दिनों अपने आवास को लेकर चर्चा में हैं। उन्हें उपराष्ट्रपति रहते हुए जो सरकारी आवास मिला था, उसे अब खाली करना होगा। 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद के चुनाव होने हैं और उससे पहले उन्हें चर्च रोड स्थित आवास छोड़ना पड़ेगा। हालांकि, अभी तक उन्हें पूर्व उपराष्ट्रपति के तौर पर मिलने वाला सरकारी आवास नहीं मिला है। ऐसे में उन्होंने अस्थायी रूप से दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर एन्क्लेव में रहने का निर्णय लिया है।
धनखड़ ने पिछले साल अप्रैल महीने में उपराष्ट्रपति पद संभालने के बाद सरकारी निवास ग्रहण किया था। अब पद छोड़ने के बाद उन्हें नया ठिकाना मिलना बाकी है। नियमों के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को टाइप-8 बंगला आवंटित किया जाता है। फिलहाल जब तक उन्हें वह आवास नहीं मिल जाता, वे निजी आवास में ही रहेंगे।
राजस्थान विधानसभा से पेंशन की अर्जी
जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विधानसभा में अपने लिए पेंशन की अर्जी भी लगाई है। वे कांग्रेस के टिकट पर राजस्थान से विधायक रह चुके हैं। उपराष्ट्रपति बनने के बाद उनकी पेंशन पर रोक लग गई थी क्योंकि उस पद पर रहते हुए उन्हें अन्य किसी पेंशन का हक नहीं था। लेकिन अब वे एक बार फिर पूर्व विधायक के तौर पर यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।
राजस्थान के नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति विधायक रहने के बाद सांसद या मंत्री बनता है तो उसे अलग-अलग पदों की पेंशन मिलती है। इस नियम के चलते अब धनखड़ को फिर से पेंशन का लाभ मिलेगा। यह कदम उनके निजी जीवन की आर्थिक स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस्तीफा और स्वास्थ्य कारण
74 वर्षीय जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया। उनका कार्यकाल अभी बाकी था लेकिन लगातार बिगड़ती तबीयत के चलते उन्होंने पद छोड़ना उचित समझा। इस कारण से उपराष्ट्रपति का चुनाव 9 सितंबर को आयोजित किया जाएगा।
धनखड़ का राजनीतिक और संवैधानिक जीवन लंबा रहा है। उन्होंने वकील, सांसद, मंत्री और उपराष्ट्रपति जैसे बड़े पदों की जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। उनके इस्तीफे ने राजनीति में हलचल मचा दी थी, क्योंकि बहुत कम ही उपराष्ट्रपति कार्यकाल से पहले अपना पद छोड़ते हैं।
सरकारी आवास पर संशय और इंतजार
पूर्व उपराष्ट्रपति को आवास आवंटित करने की जिम्मेदारी केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की है। मंत्रालय के अधिकारियों ने धनखड़ से मुलाकात की थी, लेकिन उनके आवास को लेकर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई। धनखड़ के कार्यालय ने नियमों के तहत औपचारिक आवेदन कर दिया है। आवेदन मिलने के बाद पूर्व उपराष्ट्रपति को कई विकल्प दिए जाते हैं और फिर लोक निर्माण विभाग द्वारा जरूरी कार्रवाई की जाती है, जिसमें संशोधन और मरम्मत शामिल होती है।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया कम से कम तीन महीने का समय लेती है। लेकिन अब तक इसमें कोई खास प्रगति नहीं हुई है। यही कारण है कि धनखड़ ने खुद के लिए छतरपुर एन्क्लेव में निजी निवास चुन लिया है। उनके फैसले से साफ है कि वे किसी भी तरह की असुविधा से बचते हुए इंतजार करना पसंद करेंगे