Debt Trap Warning Signs: आज के समय में लोगों पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। जरूरत से ज्यादा वस्तुएं खरीदने के लिए ईएमआई (EMI) पर सामान लेना और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना आम हो गया है। अक्सर लोग बिना सोचे-समझे खरीदारी कर लेते हैं, जिससे मासिक ईएमआई का भार लगातार बढ़ता चला जाता है। बैंक खाते में कम बैलेंस होने के बावजूद लोग ऋण और किस्तों के माध्यम से खर्च करते रहते हैं।
सच्चाई यह है कि कई बार व्यक्ति यह महसूस भी नहीं करता कि वह धीरे-धीरे ऋण जाल में फंस रहा है। तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है और व्यक्ति पहले ही कर्ज के दबाव में आ चुका होता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि हम उन संकेतों को पहचानें जो यह बताते हैं कि आप ऋण जाल में फंसने वाले हैं।
नए ऋण लेने की आदत
ऋण जाल में फंसे व्यक्ति का सबसे पहला और स्पष्ट संकेत यह होता है कि वह पुराने ऋण का भुगतान करने के लिए नया ऋण लेने लगता है। इसे ऋण का चक्र कहा जाता है। जब आप नए कर्ज से पुराने कर्ज का भुगतान करने लगते हैं, तो आपकी मासिक आय और खर्च के बीच की दूरी बढ़ जाती है, जिससे वित्तीय स्थिति और बिगड़ने लगती है।
यह स्थिति लगातार बढ़ती जाती है और व्यक्ति को अपने खर्च और बचत पर नियंत्रण खोने का खतरा रहता है। ऐसे में समझदारी से निर्णय लेना और ऋण से बाहर निकलने की रणनीति बनाना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
ईएमआई पर अधिक खर्च और न्यूनतम भुगतान
ऋण जाल में फंसे व्यक्ति की आम पहचान यह होती है कि उसकी अधिकांश आय सिर्फ ईएमआई और ऋण चुकाने में ही खर्च होती है। अगर आपकी भी कमाई का बड़ा हिस्सा ईएमआई पर खर्च हो रहा है, तो सावधान रहने की जरूरत है। ईएमआई पर अधिक खर्च करने से बचत और वित्तीय योजना प्रभावित होती है।
इसके साथ ही एक और संकेत यह है कि व्यक्ति केवल न्यूनतम भुगतान करने लगता है। क्रेडिट कार्ड या ऋण में सिर्फ न्यूनतम राशि चुकाना तत्काल दंड से बचाता है, लेकिन मूल राशि कम नहीं होती। परिणामस्वरूप ब्याज लगातार बढ़ता रहता है और ऋण का बोझ और ज्यादा बढ़ जाता है।
वर्षों के बाद भी बचत न होना
यदि कई वर्षों तक काम करने के बावजूद आपके पास कोई बचत नहीं है, तो यह भी ऋण जाल में फंसे होने का संकेत हो सकता है। इसका कारण या तो यह है कि व्यक्ति ने बचत और निवेश पर ध्यान नहीं दिया, या फिर वह लगातार ऋण चक्र में फंसता रहा।
बिना बचत के जीवन में अचानक वित्तीय आपात स्थितियों से निपटना मुश्किल हो जाता है। इसलिए समय रहते वित्तीय स्थिति का आकलन करना, खर्चों पर नियंत्रण रखना और नियमित रूप से बचत और निवेश करना बेहद जरूरी है।

