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Wednesday, January 7, 2026
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Congress MP Shashi Tharoor: शशि थरूर के बयान से कांग्रेस में हलचल, विदेश नीति पर पार्टी लाइन से अलग सुर

Congress MP Shashi Tharoor: कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर एक बार फिर अपने बयान को लेकर राजनीतिक तूफान के केंद्र में आ गए हैं। एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके बयान ने न सिर्फ कांग्रेस पार्टी के भीतर हलचल मचा दी है, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विदेश नीति को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है। थरूर ने साफ शब्दों में कहा कि विदेश नीति किसी एक राजनीतिक दल की नहीं होती, बल्कि यह पूरे देश की नीति होती है। उनके इस बयान को कई लोग कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कथित तौर पर विदेशों में भारत सरकार की आलोचना से जोड़कर देख रहे हैं। इसी वजह से यह बयान पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा का विषय बन गया है।

कांग्रेस के भीतर असहजता, बाहर समर्थन

शशि थरूर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरने की कोशिश करता रहा है। ऐसे माहौल में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का राष्ट्रीय एकता और द्विदलीय दृष्टिकोण की बात करना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। बयान के बाद कांग्रेस के अंदर कुछ नेताओं में असहजता देखी गई, वहीं भाजपा और अन्य वर्गों से थरूर को समर्थन भी मिला। मीडिया द्वारा जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भाजपा के पक्ष में बोल रहे हैं, तो थरूर ने स्पष्ट जवाब देते हुए कहा, “मैं जो कहता हूं और लिखता हूं, उसे ध्यान से सुनिए और पढ़िए। दूसरों की व्याख्या पर भरोसा मत कीजिए। मैंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है, जैसा बताया जा रहा है।” उनके इस जवाब से साफ है कि वह अपने बयान पर कायम हैं और उसे गलत संदर्भ में पेश किए जाने से नाराज भी हैं।

विदेश नीति पर थरूर की स्पष्ट सोच

अपने बयान में शशि थरूर ने जोर देकर कहा कि विदेश नीति को घरेलू राजनीति का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि जब कोई भी नेता अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करता है, तो वह सिर्फ अपनी पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश का चेहरा होता है। इसलिए वहां कही गई बातें देशहित में होनी चाहिए। उनके इस बयान को राहुल गांधी के हालिया बयानों से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने विदेश में भारतीय सरकार की आलोचना की थी। थरूर का संकेत यह था कि आंतरिक राजनीतिक मतभेदों को वैश्विक मंचों पर ले जाना देश की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। यह विचार कई राजनीतिक विश्लेषकों को संतुलित और परिपक्व लगा, जबकि कुछ कांग्रेस नेताओं को यह पार्टी लाइन से अलग नजर आया।

राजनीतिक संदेश और आगे की राह

शशि थरूर का यह बयान केवल एक व्यक्तिगत राय नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक व्यापक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या कांग्रेस के भीतर विदेश नीति को लेकर अलग-अलग सोच उभर रही है। थरूर पहले भी कई बार पार्टी से अलग राय रख चुके हैं, लेकिन इस बार मुद्दा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा होने के कारण ज्यादा संवेदनशील हो गया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस बयान को कैसे लेता है और क्या पार्टी विदेश नीति जैसे मुद्दों पर अधिक सतर्क और एकजुट रुख अपनाती है। फिलहाल इतना तय है कि शशि थरूर का यह बयान भारतीय राजनीति में विदेश नीति और राष्ट्रीय एकता को लेकर एक नई बहस को जन्म दे चुका है।

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