Anti-Dumping Duty: भारत सरकार ने घरेलू उद्योगों को सस्ते चीनी आयात से बचाने के लिए चीन से आयातित पांच प्रमुख उत्पादों पर एंटी-डंपिंग शुल्क (Anti-Dumping Duty) लगाने का निर्णय लिया है। इसमें एल्युमिनियम फॉयल सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) की सिफारिश पर यह कदम उठाया गया है।
एंटी-डंपिंग शुल्क का उद्देश्य घरेलू उत्पादकों को सस्ते विदेशी उत्पादों के कारण होने वाले नुकसान से बचाना और निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करना है।
क्या है एंटी-डंपिंग शुल्क?
एंटी-डंपिंग शुल्क एक प्रकार का आयात कर (Import Tax) है, जिसे किसी देश में बेचे जा रहे आयातित उत्पादों पर लगाया जाता है। जब कोई देश किसी उत्पाद को उसकी वास्तविक कीमत से कम दाम पर दूसरे देश में निर्यात करता है, तो इसे डंपिंग कहा जाता है।
अगर इससे आयात करने वाले देश की घरेलू कंपनियों को नुकसान होता है, तो वह सरकार एंटी-डंपिंग शुल्क लगाती है। यह शुल्क आयातित उत्पाद की वास्तविक कीमत और उसके निर्यात मूल्य के बीच के अंतर को पूरा करता है, जिससे घरेलू उत्पादकों को नुकसान नहीं होता।
कैसे तय किया जाता है एंटी-डंपिंग शुल्क?
भारत में एंटी-डंपिंग शुल्क वाणिज्य मंत्रालय की जांच इकाई DGTR की सिफारिश पर लगाया जाता है। DGTR यह जांच करता है कि क्या सस्ते आयात से घरेलू उत्पादकों को वाकई नुकसान हो रहा है। अगर नुकसान की पुष्टि होती है, तो सरकार एंटी-डंपिंग शुल्क लगाती है।
चीन के इन 5 उत्पादों पर लगाया गया एंटी-डंपिंग शुल्क
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एल्युमिनियम फॉयल:
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चीन से आयात होने वाले एल्युमिनियम फॉयल पर 873 अमेरिकी डॉलर प्रति टन तक का अस्थायी एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया गया है।
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यह शुल्क 6 महीने के लिए लागू रहेगा।
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ट्राइक्लोरो आइसोस्यान्यूरिक एसिड (Trichloro Isocyanuric Acid):
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यह रसायन मुख्य रूप से जल शुद्धिकरण (Water Treatment) में उपयोग किया जाता है।
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इस पर 276 अमेरिकी डॉलर से 986 अमेरिकी डॉलर प्रति टन तक का शुल्क लगाया गया है।
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सॉफ्ट फेराइट कोर (Soft Ferrite Core):
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इसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, चार्जर और दूरसंचार उपकरणों में किया जाता है।
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इस पर आयात लागत (CIF – Cost, Insurance, Freight) के मूल्य पर 35% तक का शुल्क लगाया गया है।
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वैक्यूम इंसुलेटेड फ्लास्क:
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चीन से आयातित वैक्यूम इंसुलेटेड फ्लास्क पर 1,732 अमेरिकी डॉलर प्रति टन का एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया गया है।
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इस उत्पाद का उपयोग हॉट और कोल्ड ड्रिंक्स को लंबे समय तक तापमान में बनाए रखने के लिए किया जाता है।
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पॉली विनाइल क्लोराइड पेस्ट रेजिन (PVC Paste Resin):
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चीन के अलावा दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नॉर्वे, ताइवान और थाईलैंड से आयातित PVC पेस्ट रेजिन पर भी शुल्क लगाया गया है।
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इस पर 89 अमेरिकी डॉलर से 707 अमेरिकी डॉलर प्रति टन का शुल्क तय किया गया है।
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भारत को क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
चीन से सस्ते उत्पादों का आयात भारतीय बाजार में बढ़ रहा था, जिससे देश के छोटे और मध्यम उद्योगों को नुकसान हो रहा था। कई उत्पादों की कीमत लागत से भी कम थी, जिससे घरेलू उत्पादकों को अपनी लागत निकालना मुश्किल हो रहा था।
DGTR की जांच में पाया गया कि ये आयातित उत्पाद घरेलू उत्पादकों के लिए हानिकारक साबित हो रहे थे। इसके बाद सरकार ने घरेलू उद्योग को बचाने के लिए एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने का निर्णय लिया।
एंटी-डंपिंग शुल्क का प्रभाव
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घरेलू उद्योग को राहत:
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एंटी-डंपिंग शुल्क से भारतीय कंपनियों को नुकसान नहीं होगा और वे प्रतिस्पर्धा में बने रहेंगे।
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घरेलू उत्पादकों को उचित मूल्य मिलेगा और उनके उत्पाद बाजार में टिक पाएंगे।
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विदेशी उत्पाद महंगे होंगे:
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चीनी उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिससे उनकी बिक्री कम होगी।
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इससे भारतीय कंपनियों को फायदा मिलेगा।
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निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा:
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एंटी-डंपिंग शुल्क से बाजार में समान प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा।
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घरेलू उत्पादकों को भी उचित अवसर मिलेगा।
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एंटी-डंपिंग शुल्क का आर्थिक असर
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एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने से भारतीय कंपनियों को मूल्य प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी।
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घरेलू कंपनियों का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
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सरकार को आयात से मिलने वाले राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।
भारत सरकार का यह कदम घरेलू उद्योगों को सस्ते चीनी आयात से बचाने के लिए उठाया गया है। एंटी-डंपिंग शुल्क से घरेलू उत्पादकों को राहत मिलेगी और वे प्रतिस्पर्धा में बने रहेंगे। इससे भारतीय बाजार में चीनी उत्पादों की बढ़ती पकड़ को भी कमजोर किया जा सकेगा।
एंटी-डंपिंग शुल्क का उद्देश्य निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देना और भारतीय उद्योगों को मजबूत बनाना है। ऐसे में यह निर्णय घरेलू उत्पादकों के लिए एक बड़ा सहारा साबित होगा।