UPI भुगतान पर नए MDR ढांचे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दावा किया कि व्यापारी पर लगने वाली फीस का असर अंततः ग्राहक तक पहुंच सकता है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि MDR ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा।
हुड्डा ने UPI फीस को लेकर उठाए सवाल
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आरोप लगाया कि UPI भुगतान पर लगने वाली फीस आम लोगों के लिए महंगाई का एक और कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार भले ही ग्राहक पर सीधे शुल्क नहीं लगने की बात कर रही हो, लेकिन व्यापारियों की लागत बढ़ने पर उसका असर कीमतों में दिखाई दे सकता है।
हुड्डा ने पेट्रोल-डीजल, कार्ड भुगतान और अन्य सेवाओं में लगने वाले शुल्क का उदाहरण देते हुए अपने तर्क को समझाया।
कार्ड और दूसरी फीस का दिया उदाहरण
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कई कारोबारों में भुगतान से जुड़ी लागत अलग-अलग नामों से ग्राहक तक पहुंचती है। उन्होंने पेट्रोल पंपों के ‘फ्यूल सरचार्ज’, ज्वैलर्स के ‘कार्ड सरचार्ज’ और टिकट या ट्रैवल बुकिंग में लगने वाली ‘कन्वीनिएंस फीस’ का उदाहरण दिया।
उनका तर्क है कि इसी तरह UPI से जुड़ी व्यापारी लागत भी कुछ मामलों में वस्तुओं या सेवाओं की कीमतों में शामिल हो सकती है।
छोटे कारोबारियों पर भी उठाया सवाल
हुड्डा ने छोटे व्यापारियों को UPI MDR से मिलने वाली छूट को लेकर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि यदि छोटे व्यापारी खुद शुल्क से बाहर भी रहते हैं, तो उनके सप्लायर या थोक कारोबारियों की लागत बढ़ने का अप्रत्यक्ष असर उनके खरीद मूल्य पर पड़ सकता है।
हालांकि, इस दावे को नीति के वास्तविक प्रावधानों से अलग करके देखना जरूरी है।

सरकार ने ग्राहक पर शुल्क से किया इनकार
केंद्र सरकार के अनुसार नए ढांचे में पर्सन-टू-पर्सन UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे। छोटे व्यापारियों के लिए ₹1 लाख मासिक तक UPI QR प्राप्तियों पर भी शून्य MDR का प्रावधान है। सरकार का कहना है कि करीब 96% P2M लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे।
₹2,000 से अधिक के निर्धारित मर्चेंट लेन-देन पर 0.4% MDR लागू होगा, जबकि ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर अधिकतम MDR ₹300 होगा। कुछ आवश्यक क्षेत्रों में अलग फ्लैट शुल्क व्यवस्था रखी गई है।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR ढांचा
नया MDR ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और अन्य प्रतिभागियों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है।
यही वह बिंदु है जहां राजनीतिक बहस और सरकारी स्पष्टीकरण अलग-अलग दिखाई देते हैं। हुड्डा संभावित अप्रत्यक्ष असर की बात कर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि ग्राहक से सीधे UPI शुल्क नहीं लिया जाएगा।
UPI MDR को लेकर असली सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि शुल्क कौन देगा, बल्कि यह भी है कि व्यापारी अपनी लागत को कीमतों में किस हद तक शामिल करते हैं। 15 अक्टूबर के बाद बाजार में इसका वास्तविक असर ही इस बहस की तस्वीर को ज्यादा स्पष्ट करेगा।

