गया में 25 सितंबर से शुरू होने वाले पितृपक्ष मेले से पहले ऑनलाइन ई-पिंडदान को लेकर विवाद सामने आया है। पर्यटन विभाग के पैकेज पर गया के पंडा समाज ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि पिंडदान जैसी धार्मिक परंपरा श्रद्धालु को स्वयं गया आकर करनी चाहिए।
पितृपक्ष मेले से पहले ई-पिंडदान पर विवाद
बिहार के गया में पितृपक्ष मेला 25 सितंबर 2026 से शुरू होने जा रहा है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसी बीच बिहार सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे ई-पिंडदान पैकेज को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
विष्णुपद मंदिर परिसर में श्री विष्णु प्रबंधकारिणी समिति ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था पर आपत्ति जताई। समिति के सदस्यों का कहना है कि पिंडदान केवल ऑनलाइन माध्यम से करवाने के बजाय श्रद्धालु को स्वयं गया आकर धार्मिक अनुष्ठान करना चाहिए।
पंडा समाज ने धार्मिक परंपरा का दिया हवाला
विष्णुपद मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों के अनुसार, ऑनलाइन पिंडदान का विरोध पहली बार नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि जब से ई-पिंडदान की व्यवस्था शुरू हुई है, तब से इसका विरोध किया जाता रहा है।
समिति का दावा है कि धार्मिक ग्रंथों में ऑनलाइन माध्यम से पिंडदान कराने का उल्लेख नहीं मिलता। उनके अनुसार, गया आकर अपने हाथों से माता-पिता और पूर्वजों के लिए पिंडदान करने की परंपरा रही है। इसी आधार पर पंडा समाज ई-पिंडदान व्यवस्था को लेकर अपनी आपत्ति जता रहा है।
गया में क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है पिंडदान?
गया को हिंदू धार्मिक परंपरा में पिंडदान और श्राद्ध के प्रमुख तीर्थस्थलों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गया में पिंडदान करने से पितरों की मुक्ति और पितृऋण से छुटकारे की कामना की जाती है।
मान्यता यह भी है कि भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता ने गया में फल्गु नदी के किनारे राजा दशरथ का श्राद्ध और पिंडदान किया था। यही वजह है कि पितृपक्ष के दौरान गया में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए पांच तरह के पिंडदान पैकेज
पितृपक्ष मेला-2026 के लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग-अलग पिंडदान एवं पर्यटन पैकेज जारी किए हैं। ये पैकेज 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी बताए गए हैं।
पैकेज-A में पटना, पुनपुन घाट और गयाजी की यात्रा शामिल है। एक दिवसीय इस पैकेज की कीमत होटल श्रेणी और यात्रियों की संख्या के अनुसार ₹14,550 से ₹30,650 तक है।
पैकेज-B एक रात और दो दिन का है। इसमें पटना, पुनपुन घाट, गयाजी के साथ नालंदा और राजगीर का भ्रमण शामिल है। इसकी कीमत ₹18,850 से ₹40,700 तक बताई गई है।
पैकेज-C गयाजी का एक दिवसीय पिंडदान पैकेज है। इसमें फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान की व्यवस्था शामिल है। इसकी कीमत ₹11,250 से ₹25,250 तक है।
पैकेज-D एक रात और दो दिन का गयाजी पैकेज है, जिसे देर रात, सुबह या शाम पिंडदान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए तैयार किया गया है। इसकी कीमत ₹16,000 से ₹39,500 तक है।
पैकेज-E में गयाजी के साथ राजगीर और नालंदा का भ्रमण शामिल है। इसकी कीमत ₹16,550 से ₹32,850 तक बताई गई है।
₹23 हजार में ई-पिंडदान की सुविधा
जो श्रद्धालु किसी कारणवश गया नहीं पहुंच सकते, उनके लिए पर्यटन निगम ने ऑनलाइन ई-पिंडदान पैकेज भी उपलब्ध कराया है। इसकी कुल कीमत जीएसटी सहित ₹23,000 बताई गई है।
इस पैकेज में विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट और फल्गु नदी पर पिंडदान या तर्पण, पुरोहित की सेवाएं, पूजन सामग्री और दक्षिणा शामिल हैं। इसके अलावा पूरे अनुष्ठान की वीडियो रिकॉर्डिंग और उसकी पेन ड्राइव उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी बताई गई है।
2024 में शुरू हुई थी ई-पिंडदान व्यवस्था
बिहार सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से गया में ई-पिंडदान की सुविधा वर्ष 2024 में पितृपक्ष मेले के दौरान शुरू की गई थी। उस समय भी पंडा समाज की ओर से इसका विरोध किए जाने की बात सामने आई थी।
अब 2026 के पितृपक्ष मेले से पहले एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में है। एक तरफ सरकार श्रद्धालुओं की सुविधा और उन लोगों तक धार्मिक अनुष्ठान की पहुंच बनाने के लिए ऑनलाइन विकल्प उपलब्ध करा रही है, वहीं पंडा समाज धार्मिक परंपरा के व्यक्तिगत रूप से पालन पर जोर दे रहा है। यही अंतर इस पूरे विवाद का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

