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Wednesday, September 16, 2026
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IAS रिंकू दुग्गा की बहाली पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, केंद्र की अपील पर जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने IAS अधिकारी रिंकू दुग्गा को बहाल करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। केंद्र सरकार ने दुग्गा को दी गई अनिवार्य सेवानिवृत्ति को रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। इसी अपील पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह अंतरिम आदेश दिया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले में रिंकू दुग्गा को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की है।

7 सितंबर के आदेश में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने 7 सितंबर के अपने आदेश में कहा कि फिलहाल रिंकू दुग्गा की बहाली पर रोक जारी रहेगी। केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत में पक्ष रखा।

मामले में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें अदालत ने दुग्गा की अनिवार्य सेवानिवृत्ति को रद्द करते हुए उन्हें राहत दी थी।

IAS रिंकू दुग्गा की बहाली पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, केंद्र की अपील पर जारी किया नोटिस

CAT ने भी दिया था बहाली का आदेश

रिंकू दुग्गा ने केंद्र सरकार के अनिवार्य सेवानिवृत्ति के फैसले को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में चुनौती दी थी। CAT ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए बहाली का आदेश दिया था।

इसके बाद केंद्र सरकार के फैसले का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल को CAT के फैसले को बरकरार रखा था। अब केंद्र सरकार ने इसी निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

2022 में त्यागराज स्टेडियम विवाद से आईं चर्चा में

रिंकू दुग्गा और उनके IAS पति पर वर्ष 2022 में दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम को कथित तौर पर उनके कुत्ते को टहलाने के लिए खाली करवाने का आरोप लगा था। घटना से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह मामला काफी चर्चा में आया था।

इस विवाद के बाद दोनों अधिकारियों को लेकर सार्वजनिक स्तर पर काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। बाद में रिंकू दुग्गा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हुई थी।

हाईकोर्ट ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर उठाए थे सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि स्टेडियम से जुड़े मामले में रिंकू दुग्गा को पहले ही मामूली सजा दी जा चुकी थी। अदालत ने बिना अनुमति अनुपस्थित रहने के आरोप का भी उल्लेख किया था।

इन घटनाओं को उनकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश में आधार बनाया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने माना कि समीक्षा समिति की ओर से अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सिफारिश को उचित नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि समिति ने उनके सेवा रिकॉर्ड से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातों पर पर्याप्त विचार नहीं किया था।

APAR और प्रमोशन पर भी हाईकोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने रिंकू दुग्गा के सेवा रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया था। अदालत के अनुसार, उनकी सालाना प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट यानी APAR में कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं थी। इसके अलावा पिछले वर्ष उनकी ग्रेडिंग भी बेहतर रही थी और उन्हें पदोन्नति के लिए विचार किए जाने की स्थिति में बताया गया था।

अदालत ने कहा था कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का उद्देश्य ऐसे अधिकारियों को सेवा से हटाना है, जिन्हें अयोग्य या अनुपयोगी माना जाता है। हाईकोर्ट के अनुसार, यह सिद्धांत दुग्गा के मामले में लागू नहीं होता।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर

दिल्ली हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद रिंकू दुग्गा की बहाली का रास्ता खुला था, लेकिन केंद्र की अपील के बाद मामला फिर शीर्ष अदालत में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल बहाली पर रोक लगा दी है। अब 13 अक्टूबर की सुनवाई में इस मामले की आगे की दिशा तय होगी।

यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की सेवा से जुड़ा विवाद नहीं है, बल्कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए सरकारी समीक्षा और सेवा रिकॉर्ड के मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण सवालों से भी जुड़ा है। अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी।

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