बिहार में बाढ़ का असर लगातार कई इलाकों में दिखाई दे रहा है। इसी बीच स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को वैशाली के राघोपुर पहुंचे। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया और राहत शिविर में रह रहे लोगों से उनकी परेशानियों और जरूरतों के बारे में जानकारी ली।
राहत शिविर की व्यवस्थाएं देखीं
मंत्री ने राहत शिविर में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से बातचीत कर यह समझने की कोशिश की कि उन्हें किन जरूरी चीजों की आवश्यकता है। निशांत कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राहत शिविरों में रह रहे परिवारों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
चिकित्सा दल से ली स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी
दौरे के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने मौके पर मौजूद चिकित्सा दल से भी बातचीत की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, उपलब्ध संसाधनों और दवाओं की जानकारी ली। मंत्री ने स्पष्ट किया कि आपदा के समय स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।

दवाओं और इलाज की व्यवस्था पर जोर
निशांत कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक जरूरी दवाएं और चिकित्सा सुविधाएं समय पर पहुंचाई जाएं। उन्होंने चिकित्सा टीमों को जरूरत के मुताबिक लोगों की मदद करने और प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर नजर रखने को कहा।
बाढ़ के दौरान दूषित पानी, संक्रमण और दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में राहत शिविरों में प्राथमिक उपचार और जरूरी दवाओं की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
पिता नीतीश कुमार की बात का किया जिक्र
राघोपुर दौरे के बाद निशांत कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ तस्वीरें साझा कीं। इस पोस्ट में उन्होंने अपने पिता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि वे हमेशा कहते रहे हैं कि सरकारी खजाने पर सबसे पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है।
प्रभावित परिवारों की मदद को बताया प्राथमिकता
निशांत कुमार ने कहा कि इसी सोच के साथ बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत और आवश्यक सहायता पहुंचाने का काम जारी है। उन्होंने अधिकारियों से दवाएं, इलाज और दूसरी जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने को कहा।
बाढ़ जैसी आपदा में राहत सिर्फ भोजन और रहने की व्यवस्था तक सीमित नहीं रहती। बीमारियों से बचाव और समय पर इलाज भी उतना ही जरूरी है। राघोपुर में स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश इसी चुनौती पर केंद्रित रहे। अब असली कसौटी यही होगी कि ये सुविधाएं जमीन पर प्रभावित लोगों तक कितनी तेजी से पहुंचती हैं।

