दिल्ली के पाटियाला हाउस कोर्ट के फैसले के बाद स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े कथित मारपीट मामले में अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस बीच मामले में SC/ST एक्ट और POCSO जैसी गंभीर धाराएं जुड़ने से विवाद और गहरा गया है।
14 दिन की न्यायिक हिरासत
पाटियाला हाउस कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दिल्ली पुलिस ने हिरासत बढ़ाने की मांग की थी। पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताए जाने के बाद भारद्वाज को अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया।
अब उन्हें 21 सितंबर को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा। अदालत का यह आदेश ऐसे समय आया है जब हाईकोर्ट में उनकी ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण संबंधी याचिका भी दाखिल की गई है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा मामला
मामले की जड़ जून में जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से जुड़ी है। आरोप है कि कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग कार्यकर्ता के पिता के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी।

स्वतंत्र भारद्वाज को इसी मामले में शनिवार को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले CJP ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन कर उनकी गिरफ्तारी की मांग भी की थी।
FIR में जुड़ी गंभीर धाराएं
पुलिस ने कथित मारपीट के मामले में दर्ज प्राथमिकी में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराएं जोड़ी हैं।
इसके अलावा नाबालिग कार्यकर्ता की शिकायत पर POCSO Act के तहत अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है। कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि अपने पिता के साथ कथित मारपीट के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उसे ऑनलाइन धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
एक इंटरव्यू से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे मामले में एक इंटरव्यू भी अहम कड़ी बन गया। भारद्वाज ने कथित तौर पर इंटरव्यू के दौरान एक व्यक्ति के सिर पर चोट पहुंचाने की बात कही थी और दावा किया था कि उसे 60 टांके लगे थे।
उन्होंने इस घटना का जिक्र करते हुए IPC की धारा 307 का भी उल्लेख किया था। इसी बयान के बाद मामले को लेकर सवाल और विवाद दोनों बढ़ते गए।
अब हाईकोर्ट पर भी नजर
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद मामला अब निचली अदालत से आगे हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका और पाटियाला हाउस कोर्ट की न्यायिक हिरासत के आदेश ने कानूनी लड़ाई को नया मोड़ दिया है।
फिलहाल अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत तय की है। अब 21 सितंबर की पेशी महत्वपूर्ण होगी, जहां मामले की आगे की दिशा पर नजर रहेगी।

