उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक मस्जिद को लेकर विवाद बढ़ गया है। प्रशासन ने अदालत के आदेश के बाद मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शुरू की है। कार्रवाई के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद पर कार्रवाई
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बनी मस्जिद को प्रशासन ने अवैध घोषित किया था। बताया गया है कि सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने पिछले महीने इसे अवैध मानते हुए हटाने का आदेश दिया था।
इसके बाद शुक्रवार को SDM, सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की मौजूदगी में मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है।
अखिलेश यादव बोले- सौहार्द बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी
कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सौहार्द बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होने के साथ-साथ उसकी उपलब्धि भी होती है।

अखिलेश की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब सहारनपुर में मस्जिद हटाने की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।
इमरान मसूद ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे संविधान से जोड़कर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद 1911 से पहले की है और कार्रवाई के लिए अभी कुछ समय बाकी था।
इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि मस्जिद को रातोंरात चारों तरफ से घेरकर गिराया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं है, बल्कि संविधान और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा सवाल है।
हालांकि, मसूद के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।
‘हाई कोर्ट में सब कुछ नजरअंदाज किया गया’
इमरान मसूद ने आगे दावा किया कि मस्जिद का मालिकाना हक अभी भी वाहिद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट की कार्यवाही में वक्फ बोर्ड को पक्षकार नहीं बनाया गया।
मसूद ने यह भी दावा किया कि कार्रवाई के दौरान इलाके को चारों तरफ से घेर दिया गया और लोगों को घरों से बाहर निकलने से रोका गया। उन्होंने इसे सहारनपुर के लोगों के लिए ‘काला दिन’ बताते हुए विरोध की अपील की।
BJP-कांग्रेस के बीच बढ़ सकती है सियासी गर्मी
मस्जिद पर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को सरकार की कार्रवाई और सामाजिक सौहार्द से जोड़कर उठा रहे हैं।
वहीं, प्रशासन की ओर से कार्रवाई को अदालत के आदेश के तहत बताया गया है। ऐसे में अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और प्रशासन के रिकॉर्ड भी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ सकते हैं।
सहारनपुर में हाई अलर्ट
कार्रवाई को देखते हुए पूरे सहारनपुर जिले में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। संवेदनशील स्थानों पर PAC और RRF की तैनाती की गई है। इसके अलावा दमकल की गाड़ियों को भी अलग-अलग स्थानों पर लगाया गया है।
पुलिस प्रशासन ने भीड़ जुटने या तनाव की स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रशासन की कोशिश है कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।
अब आगे क्या?
सहारनपुर में मस्जिद हटाने की कार्रवाई ने एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई और धार्मिक-सामाजिक संवेदनशीलता के सवाल को सामने ला दिया है। एक तरफ प्रशासन इसे अदालत के आदेश के तहत की गई कार्रवाई बता रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे लेकर गंभीर सवाल उठा रहा है।
अब इस पूरे मामले में अदालत के आदेश, मस्जिद की भूमि और निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड तथा प्रशासनिक प्रक्रिया की स्थिति आगे की तस्वीर साफ करने में अहम होगी।

