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Friday, September 4, 2026
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गुड्डू बादशाह हत्याकांड का खुलासा, 12 हजार किमी पीछा कर 5 राज्यों से 8 आरोपी गिरफ्तार

28 जुलाई को पुल प्रह्लादपुर के लाल कुआं इलाके में D-29, चुंगी नंबर-3 के पास फायरिंग की सूचना पुलिस को मिली थी। मौके पर गुड्डू बादशाह गोली लगने से मृत मिला था, जबकि फारुख नाम का एक व्यक्ति घायल अवस्था में मिला।

शुरुआत में फारुख ने खुद को घटना का पीड़ित बताया था। लेकिन पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान उसके बयान में कई विरोधाभास सामने आए। इसके बाद CDR, तकनीकी निगरानी और दूसरे साक्ष्यों की जांच की गई।

पुलिस का दावा है कि जांच आगे बढ़ने पर फारुख की भूमिका भी कथित साजिश में सामने आई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

बिहार की पुरानी रंजिश में रची गई साजिश?

पुलिस जांच के अनुसार, हत्या के पीछे बिहार के सुपौल से जुड़ी पुरानी रंजिश सामने आई है। पुलिस का आरोप है कि शमशाद और अशफाक की गुड्डू बादशाह से पुरानी दुश्मनी थी।

जांच में कथित तौर पर सामने आया कि गुड्डू को पुराने विवाद को सुलझाने के बहाने बिहार से दिल्ली बुलाया गया। इसके बाद समझौते के लिए मुलाकात का भरोसा दिलाकर उसे लाल कुआं स्थित किराए के परिसर/गोदाम में ले जाया गया।

पुलिस के मुताबिक, वहीं कथित तौर पर गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई।

किसी ने बुलाया, किसी ने हथियार छिपाया

जांच एजेंसी के अनुसार, पूरी साजिश में आरोपियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। किसी पर गुड्डू को बुलाने और भरोसे में लेने, किसी पर ठहरने और वाहन की व्यवस्था करने, तो किसी पर हथियार छिपाने और हत्या को अंजाम देने की कथित जिम्मेदारी थी।

पुलिस का कहना है कि हत्या के बाद आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग-अलग जगहों का रुख किया और लगातार अपना ठिकाना बदलते रहे।

गुड्डू बादशाह हत्याकांड का खुलासा, 12 हजार किमी पीछा कर 5 राज्यों से 8 आरोपी गिरफ्तार

5 राज्यों में चला 12 हजार किलोमीटर का ऑपरेशन

आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए आसान नहीं थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए और पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क से बचने की कोशिश की।

इसके बावजूद जांच टीम ने CDR, तकनीकी विश्लेषण, इंटरनेट आधारित कम्युनिकेशन, लोकेशन और मूवमेंट एनालिसिस तथा CCTV फुटेज का सहारा लिया।

पुलिस के अनुसार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और तमिलनाडु में करीब 12 हजार किलोमीटर तक आरोपियों की तलाश की गई। इसी अभियान के दौरान सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार किए गए 8 आरोपी

पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनके नाम हैं:

  • मो. फारुख, 27 वर्ष, पुल प्रह्लादपुर, दिल्ली
  • मो. आफताब, सुपौल, बिहार
  • मो. इरफान, 23 वर्ष, साहिबाबाद, गाजियाबाद
  • मो. शमशाद, 28 वर्ष, सुपौल, बिहार
  • मो. अशफाक, 23 वर्ष, सुपौल, बिहार
  • मो. रहमतुल्लाह उर्फ छोटू, 22 वर्ष, सुपौल, बिहार
  • अमन यादव, 25 वर्ष, लाल कुआं, पुल प्रह्लादपुर
  • मो. शोएब अख्तर, सुपौल, बिहार

पुलिस के मुताबिक, शमशाद और अशफाक के खिलाफ सुपौल में भी आपराधिक मामलों की जानकारी सामने आई है, जिनमें कथित हत्या का मामला भी शामिल है।

किस आरोपी की क्या भूमिका बताई गई?

पुलिस के अनुसार, फारुख ने गुड्डू का भरोसा हासिल कर उसे समझौते के बहाने घटनास्थल तक पहुंचाने और दूसरे आरोपियों से समन्वय करने में कथित भूमिका निभाई। पुलिस का आरोप है कि उसने खुद को घायल पीड़ित बताकर जांच को भटकाने की कोशिश की।

आफताब पर अन्य आरोपियों से संपर्क और उनकी आवाजाही में मदद करने का आरोप है। उसे तमिलनाडु के तिरुप्पुर से स्थानीय पुलिस की मदद से गिरफ्तार किया गया।

इरफान पर आरोपियों को ठहरने की सुविधा और लॉजिस्टिक मदद देने तथा अवैध हथियार छिपाने का आरोप है। उसकी निशानदेही पर एक अवैध पिस्टल, अतिरिक्त मैगजीन और जिंदा कारतूस बरामद किए गए।

शमशाद और अशफाक पर कथित तौर पर हत्या की साजिश और आरोपियों के बीच संपर्क व समन्वय का आरोप है।

रहमतुल्लाह उर्फ छोटू पर हत्या को अंजाम देने और बाद में कथित तौर पर सबूत हटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है।

शोएब अख्तर के बारे में पुलिस का कहना है कि वह तमिलनाडु से दिल्ली तक आरोपियों की आवाजाही में उनके साथ रहा।

वहीं अमन यादव पर लाल कुआं इलाके में आरोपियों के ठहरने और अन्य लॉजिस्टिक व्यवस्था में मदद करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, घटना वाली रात वह आफताब, रहमतुल्लाह और शोएब को मोटरसाइकिल से लेकर गया था और कथित फायरिंग में भी शामिल रहा।

एक पिस्टल बरामद, दो हथियारों की तलाश जारी

पुलिस ने अब तक एक अवैध पिस्टल, अतिरिक्त मैगजीन और जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, अमन यादव और फारुख द्वारा कथित तौर पर छिपाए गए दो अन्य अवैध हथियार और केस प्रॉपर्टी बरामद करने के प्रयास जारी हैं।

बरामद हथियारों को फॉरेंसिक और बैलिस्टिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि इनमें से किसी हथियार का इस्तेमाल हत्या में हुआ था या नहीं।

मोबाइल बंद किए, फिर भी पुलिस ने खोज निकाला

गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपियों ने मोबाइल फोन बंद कर दिए और लगातार ठिकाने बदलते रहे। पुलिस के अनुसार, उन्होंने इंटरनेट और हॉटस्पॉट आधारित संचार का भी इस्तेमाल किया।

लेकिन तकनीकी जांच, CDR, इंटरनेट कम्युनिकेशन, लोकेशन और मूवमेंट पैटर्न तथा CCTV फुटेज को जोड़कर पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई।

28 जुलाई की हत्या से शुरू हुई जांच अब 8 गिरफ्तारियों तक पहुंच चुकी है। हालांकि, हथियारों की बरामदगी और फॉरेंसिक-बैलिस्टिक जांच के साथ पुलिस आगे की कड़ियां भी जोड़ रही है। मामले की पूरी तस्वीर जांच और अदालत में सामने आने वाले साक्ष्यों से स्पष्ट होगी

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