पंजाब की राजनीति में एक गंभीर आरोप ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी गुरप्रीत कौर पर रेप के आरोपी की मदद के बदले 5 करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। आरोपों के बीच अकाली दल ने जांच और कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
5 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास घेरने की तैयारी
मामले को लेकर शिरोमणि अकाली दल ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के महिला विंग की कार्यकर्ता 5 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की तैयारी में हैं।
SAD सांसद हरसिमरत कौर के बाद पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी मुख्यमंत्री परिवार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का घर अब अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के लिए अड्डा बन गया है।
डीजीपी को पत्र, राज्यपाल से भी मुलाकात
अकाली दल ने पंजाब के डीजीपी को पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा पार्टी का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से भी मिला और पूरे मामले की जांच की मांग रखी।
SAD ने इस मामले में पंजाब पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए CBI जांच की मांग की है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

सुखबीर बादल ने क्या दावा किया?
राज्यपाल से मुलाकात के बाद सुखबीर सिंह बादल ने दावा किया कि अमेरिकी नागरिक गुरी चहल पर दो महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले दर्ज हुए थे। उनके मुताबिक, एक मामला मोहाली और दूसरा अमृतसर में दर्ज हुआ था।
बादल का आरोप है कि आरोपी ने मुख्यमंत्री की पत्नी से संपर्क किया और इसके बाद दोनों मामलों में उसे कथित तौर पर क्लीन चिट मिल गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि आरोपी जमानत पर बाहर आ गया।
हरसिमरत कौर भी लगा चुकी हैं आरोप
इससे पहले हरसिमरत कौर ने भी गुरप्रीत कौर पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर रेप पीड़िताओं को न्याय नहीं मिलेगा तो वे किसके पास जाएंगी।
अकाली दल का आरोप है कि इस मामले में प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच जरूरी है। पार्टी ने कहा है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के बिना सच्चाई सामने नहीं आ सकती।
गुरप्रीत कौर ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, गुरप्रीत कौर पहले ही इन आरोपों को निराधार बता चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाने वालों को चुनौती देते हुए कहा था कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं किए गए तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगी।
यही वजह है कि अब मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। एक तरफ अकाली दल CBI जांच की मांग कर रहा है, दूसरी ओर आरोपों को गलत बताया जा रहा है।
जांच से ही सामने आएगा सच
इस विवाद में फिलहाल सबसे अहम सवाल आरोपों की सत्यता और कथित घटनाक्रम की वास्तविकता का है। किसी व्यक्ति पर अपराध या रिश्वत से जुड़ा आरोप लगना और उसका अदालत या जांच में साबित होना अलग-अलग बातें हैं।
ऐसे में निष्पक्ष जांच, उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष ही तय करेगा कि इन गंभीर आरोपों में कितनी सच्चाई है। पंजाब की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में और गरमाने के संकेत दे रहा है।

