गोरखपुर में फोरलेन निर्माण विकास की नई तस्वीर जरूर तैयार कर रहा है, लेकिन बालापार से टिकरिया तक रहने वाले लोगों के लिए बिजली कटौती बड़ी परेशानी बन गई है। खंभों की शिफ्टिंग के बीच अनिश्चित बिजली आपूर्ति ने घरों के साथ स्कूल, अस्पताल और छोटे कारोबार भी प्रभावित किए हैं।
फोरलेन निर्माण के बीच बिजली संकट
गोरखपुर के चरगांवा ब्लॉक क्षेत्र में बालापार से टिकरिया तक फोरलेन निर्माण का काम चल रहा है। सड़क निर्माण के साथ नाला बनाने का कार्य भी जारी है। इसी वजह से रास्ते में आने वाले बिजली के खंभों को लगातार दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है।
खंभों की शिफ्टिंग के चलते इलाके में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कटौती अब सामान्य असुविधा से आगे बढ़कर रोजमर्रा की जिंदगी के लिए बड़ी समस्या बन गई है।
न समय तय, न पहले मिलती सूचना
ग्रामीणों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि बिजली कटौती का कोई निश्चित समय नहीं है। कई बार बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली चली जाती है और लोगों को यह पता नहीं होता कि आपूर्ति कब बहाल होगी।

भीषण गर्मी के बीच लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से घरों में परेशानी बढ़ रही है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूल और अस्पताल भी प्रभावित
बालापार-टिकरिया क्षेत्र केवल रिहायशी इलाका नहीं है। यहां कई विद्यालय, अस्पताल और लाइब्रेरी संचालित होती हैं। बिजली की अनिश्चित कटौती का सीधा असर इन संस्थानों के कामकाज पर पड़ रहा है।
अस्पतालों में बिजली की निरंतर आपूर्ति बेहद जरूरी होती है, जबकि स्कूल और लाइब्रेरी में पंखे, रोशनी और अन्य जरूरी उपकरण बिजली पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में बार-बार होने वाली कटौती से विद्यार्थियों और मरीजों को भी परेशानी हो सकती है।
छोटे उद्योगों पर भी असर
इलाके में छोटे और लघु उद्योग भी संचालित होते हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होने से मशीनों और अन्य उपकरणों का संचालन प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय कारोबारियों के लिए बिजली कटौती का मतलब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि काम रुकने और आर्थिक नुकसान का खतरा भी है। यदि कटौती लंबे समय तक जारी रहती है तो इसका असर स्थानीय रोजगार और कारोबार पर भी पड़ सकता है।
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार बिजली कटौती और काम में देरी को लेकर क्षेत्रवासियों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ प्रभावित इलाकों में वैकल्पिक व्यवस्था भी होनी चाहिए।
ग्रामीण चाहते हैं कि बिजली के खंभों की शिफ्टिंग का काम जल्द पूरा किया जाए और तब तक कटौती का स्पष्ट शेड्यूल जारी किया जाए, ताकि लोग अपने जरूरी काम उसी के अनुसार कर सकें।
समाधान की मांग तेज
क्षेत्रवासियों ने संबंधित विभाग से जल्द बिजली व्यवस्था सुधारने की अपील की है। उनका कहना है कि फोरलेन निर्माण के कारण होने वाली अस्थायी परेशानी को समझा जा सकता है, लेकिन अनिश्चितकालीन कटौती ने स्थिति मुश्किल कर दी है।
खासकर भीषण गर्मी में बिजली की नियमित आपूर्ति जरूरी है। विकास कार्य और नागरिक सुविधाएं एक-दूसरे के विरोधी नहीं होनी चाहिएं। जरूरत इस बात की है कि निर्माण कार्य तेजी से पूरा हो और प्रभावित लोगों के लिए बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।

