संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय तीखी बहस देखने को मिली जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने स्पीकर ओम बिरला की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। इस बीच विपक्ष ने NEET विवाद और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद परिसर में जोरदार प्रदर्शन भी किया।
स्पीकर की टिप्पणी पर नाराज हुए अखिलेश यादव
लोकसभा की कार्यवाही के दौरान स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा को लेकर सहमति बन गई है और सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। इस पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि स्पीकर ने केवल कांग्रेस और संसदीय कार्य मंत्री को बुलाकर बातचीत कर ली और सवाल किया, “क्या आपने समझौता कर लिया?”
स्पीकर ओम बिरला ने दिया जवाब
अखिलेश यादव की टिप्पणी पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि वह सदन की अध्यक्षता कर रहे हैं और विपक्षी दलों के आपसी मतभेदों का समाधान उनकी जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि “आपके आपस के विवाद को मैं सीट पर बैठकर नहीं निपटा सकता।” इस दौरान सदन में कुछ समय तक शोर-शराबा भी देखने को मिला।

विपक्षी एकजुटता पर उठे सवाल
अखिलेश यादव के इस रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। इसे विपक्षी दलों के बीच आंदोलन और राजनीतिक श्रेय को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में विपक्षी गठबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे पहले 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया था।
प्रश्नकाल नहीं चल सका, संसद में जारी रहा विरोध
मानसून सत्र के तीसरे दिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों में हंगामे के कारण प्रश्नकाल प्रभावित रहा। लगातार नारेबाजी के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे और बाद में 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। संसद परिसर में विपक्षी सांसद काले कपड़े और काला पटका पहनकर प्रदर्शन करते नजर आए। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल रहे।

