भीषण गर्मी और उमस के बीच शहर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है। लगातार हो रही बिजली कटौती ने लोगों की रातों की नींद छीन ली है। बिजली गुल होते ही पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है, जिससे आम नागरिकों की मुश्किलें दोगुनी हो गई हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग राहत की उम्मीद में शिकायत करते हैं, लेकिन समाधान के बजाय उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
बढ़ती बिजली खपत के बीच व्यवस्था हुई कमजोर
बिजली निगम के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच दिनों में बिजली की दैनिक खपत 86 लाख यूनिट से बढ़कर 91 लाख यूनिट से अधिक पहुंच गई है। बढ़ती मांग के मुकाबले आपूर्ति व्यवस्था दबाव में आ गई है। इसका असर शहर के कई इलाकों में लंबे और बार-बार होने वाले बिजली कटों के रूप में देखने को मिल रहा है।
हर दिन सैकड़ों शिकायतें, फिर भी नहीं मिल रही राहत
बिजली निगम को प्रतिदिन 250 से 300 शिकायतें मिल रही हैं। कई स्थानों पर ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होकर खराब हो रहे हैं और तकनीकी टीमें लगातार मरम्मत कार्य में जुटी हैं। इसके बावजूद लोगों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समय पर समाधान नहीं मिल रहा और कई बार अधिकारी फोन तक नहीं उठाते।

बिजली गई तो पानी भी बंद, लोगों का बढ़ा गुस्सा
नागरिकों का कहना है कि पानी की सप्लाई तय समय पर होती है, लेकिन उसी दौरान बिजली चली जाने से मोटर नहीं चल पाती और पूरा दिन प्रभावित हो जाता है। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए यह स्थिति सबसे अधिक परेशान करने वाली है। उनका आरोप है कि समस्या सुनने के बजाय शिकायत करने वालों को कॉलर ट्यून सुननी पड़ती है, जिससे नाराजगी और बढ़ रही है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों ने प्रशासन और बिजली निगम से रात्रिकालीन बिजली कटौती पर तत्काल नियंत्रण, पेयजल आपूर्ति को नियमित करने और शिकायतों के त्वरित समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ तो लोगों का धैर्य जवाब दे सकता है और विरोध प्रदर्शन की स्थिति बन सकती है।
भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का सुचारु संचालन बेहद जरूरी है। बढ़ती बिजली मांग के साथ व्यवस्था को मजबूत बनाना और शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। आम नागरिक अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी और जवाबदेह व्यवस्था चाहते हैं।

