मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के फैसले ने प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया है। उनकी जगह भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। टिकट कटने के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे दतिया का राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। माना जा रहा है कि स्थानीय राजनीतिक समीकरण और पिछले चुनाव के नतीजों को देखते हुए पार्टी ने यह फैसला लिया।
डबरा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
15 अप्रैल 1960 को ग्वालियर में जन्मे नरोत्तम मिश्रा ने भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। उन्होंने जीवाजी विश्वविद्यालय से पीएचडी की और छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे। वर्ष 1990 में भाजपा ने पहली बार उन्हें डबरा विधानसभा सीट से टिकट दिया, जहां उन्होंने जीत दर्ज कर विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद 1998 और 2003 में भी उन्होंने डबरा सीट से लगातार जीत हासिल की और क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाई।

दतिया में तीन बार बने विधायक, कई अहम मंत्रालय संभाले
परिसीमन के बाद डबरा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने पर नरोत्तम मिश्रा ने दतिया विधानसभा क्षेत्र का रुख किया। वर्ष 2008, 2013 और 2018 में उन्होंने दतिया से लगातार तीन बार जीत हासिल की। इस दौरान वे मध्य प्रदेश सरकार में गृह, विधि एवं विधायी कार्य, जेल और संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहे। अपने बेबाक बयानों और संगठन में मजबूत पकड़ के कारण वे भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते रहे हैं।
2023 की हार के बाद बदले समीकरण, इस बार टिकट नहीं मिला
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रदेशभर में बड़ी जीत के बावजूद नरोत्तम मिश्रा दतिया सीट से कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती से करीब 7 हजार वोटों से चुनाव हार गए। इसके बाद से क्षेत्र में उनके राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चा शुरू हुई। उपचुनाव में उनके दोबारा उम्मीदवार बनाए जाने की अटकलें थीं, लेकिन भाजपा ने इस बार नया चेहरा उतारने का फैसला किया। पार्टी ने आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताते हुए नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट दिया। हालांकि भाजपा की ओर से टिकट बदलने की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय समीकरण और पिछले चुनावी प्रदर्शन इस फैसले के प्रमुख कारण हो सकते हैं।

