back to top
Wednesday, September 16, 2026
Homeराज्यCRPF के दो इंस्पेक्टरों को टैटू पड़ा भारी, प्रमोशन अटका, हाई कोर्ट...

CRPF के दो इंस्पेक्टरों को टैटू पड़ा भारी, प्रमोशन अटका, हाई कोर्ट ने भी नहीं दी राहत

सीआरपीएफ (CRPF) के दो इंस्पेक्टरों को असिस्टेंट कमांडेंट पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित लिमिटेड डिपार्टमेंटल कॉम्पिटिटिव एग्जाम (LDCE)-2023 के सभी चरण सफलतापूर्वक पास करने के बावजूद अंतिम मेडिकल जांच में दाहिने हाथ की बांह (सल्यूटिंग आर्म) पर बने टैटू के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया। टैटू हटवाने के बाद दोबारा मेडिकल कराने की मांग लेकर दोनों अधिकारियों ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अदालत ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं।

हाई कोर्ट ने क्यों नहीं दी राहत?

दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने कहा कि सीआरपीएफ जैसे अनुशासित बल में कार्यरत अधिकारियों को मेडिकल दिशा-निर्देशों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी उम्मीदवार की पात्रता का मूल्यांकन आवेदन की अंतिम तिथि और उस समय की मेडिकल स्थिति के आधार पर किया जाता है। मेडिकल जांच के बाद टैटू हटवा लेने से उस समय की अयोग्यता समाप्त नहीं मानी जा सकती।

CRPF के दो इंस्पेक्टरों को टैटू पड़ा भारी, प्रमोशन अटका, हाई कोर्ट ने भी नहीं दी राहत

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता अंकित मान वर्ष 2012 में सब-इंस्पेक्टर के रूप में भर्ती हुए थे और 2022 में इंस्पेक्टर बने। वहीं प्रधान चौधरी वर्ष 2010 में कॉन्स्टेबल के रूप में भर्ती हुए और 2023 में इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नत हुए।

दोनों अधिकारियों ने अप्रैल 2024 में जारी LDCE-2023 के तहत असिस्टेंट कमांडेंट पद के लिए आवेदन किया। उन्होंने जून 2024 में लिखित परीक्षा और जुलाई 2024 में शारीरिक दक्षता एवं शारीरिक मानक परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली।

हालांकि, 30 अगस्त 2024 को हुई विस्तृत मेडिकल जांच (DME) में दाहिने हाथ की बांह पर टैटू पाए जाने के कारण दोनों को अयोग्य घोषित कर दिया गया। अगले दिन हुई रिव्यू मेडिकल परीक्षा में भी यही फैसला बरकरार रखा गया।

अधिकारियों की दलील क्या थी?

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि यही टैटू उनकी प्रारंभिक भर्ती के समय भी मौजूद था और वर्षों की सेवा तथा इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति के दौरान कभी इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि भर्ती विज्ञापन में टैटू संबंधी प्रतिबंध का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। रिव्यू मेडिकल के बाद दोनों ने सर्जरी के जरिए टैटू हटवा लिया और नए मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच कराने की अनुमति मांगी, लेकिन अदालत ने यह मांग स्वीकार नहीं की।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments