मध्य प्रदेश के इंदौर में री-नीट परीक्षा को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इंदौर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया है जो छात्रों को कथित तौर पर री-नीट का पेपर बेचकर ठगी कर रहा था। हैरानी की बात यह है कि आरोपी कोई पेशेवर साइबर अपराधी नहीं, बल्कि लॉ कॉलेज का प्रथम वर्ष का छात्र निकला। आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर नीट पेपर लीक होने का दावा करता था और छात्रों को सफलता का शॉर्टकट देने का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था।
AI और ChatGPT की मदद से तैयार करता था नकली प्रश्नपत्र
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी द्वारा बेचे जा रहे प्रश्नपत्र असली नहीं थे। वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ChatGPT जैसे टूल्स की मदद से पुराने प्रश्नपत्रों और संभावित सवालों को मिलाकर फर्जी पेपर तैयार करता था। इसके बाद इन पीडीएफ फाइलों को असली री-नीट प्रश्नपत्र बताकर छात्रों को भेजता था। आरोपी प्रति छात्र 50 से 100 रुपये लेकर यह नकली प्रश्नपत्र बेच रहा था।

इंस्टाग्राम बना ठगी का माध्यम
क्राइम ब्रांच के अनुसार आरोपी इंस्टाग्राम पर लगातार पेपर लीक से जुड़ी पोस्ट और संदेश साझा करता था। इन पोस्टों को देखकर छात्र उससे संपर्क करते थे और वह उन्हें कथित प्रश्नपत्र खरीदने के लिए प्रेरित करता था। जांच में पता चला है कि आरोपी ने करीब 20 छात्रों को इस तरह फर्जी प्रश्नपत्र भेजे थे। पुलिस को उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस से कई चैट रिकॉर्ड, फर्जी पीडीएफ और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े अहम सबूत मिले हैं।
परीक्षा खत्म होने तक गोपनीय रखी गई कार्रवाई
राजस्थान के कोटा से मिले इनपुट और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के आधार पर इंदौर क्राइम ब्रांच ने आरोपी अक्षय मालवीय को गिरफ्तार किया। परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित न हो, इसलिए पुलिस ने पूरी कार्रवाई को परीक्षा समाप्त होने तक गोपनीय रखा। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अकेले इस फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था या उसके साथ कोई और भी शामिल था। फिलहाल उसके खिलाफ आईटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच जारी है।

