दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा करते हुए करीब 9 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोपी सुभाष शर्मा को गिरफ्तार किया है। आरोपी एक लॉजिस्टिक्स कंपनी में मैनेजर और अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत था। लंबे समय तक कंपनी में काम करने के कारण उसे मालिकों का पूरा भरोसा हासिल था, लेकिन उसने इसी विश्वास का गलत फायदा उठाकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया।
फर्जी वर्क ऑर्डर बनाकर निकाले करोड़ों रुपये
जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी वर्क ऑर्डर तैयार करता था और ट्रांसपोर्टेशन के नाम पर कंपनी से एडवांस भुगतान निकलवा लेता था। उसने नकली ट्रांसपोर्टरों और सप्लायरों के नाम पर कई फर्जी दस्तावेज तैयार किए। माल ढुलाई के रिकॉर्ड और डिलीवरी रसीदें भी नकली थीं। पुलिस के अनुसार कई ऐसे वाहनों को रिकॉर्ड में भारी माल ढोने वाला दिखाया गया जो वास्तव में इतना वजन उठाने में सक्षम ही नहीं थे।
फर्जी कंपनियों और बैंक खातों का जाल
आरोपी ने धोखाधड़ी की रकम को छिपाने के लिए कई फर्जी कंपनियां और बैंक खाते खोले। कंपनी से निकाली गई रकम पहले इन खातों में ट्रांसफर की जाती थी और बाद में नकद निकासी या अन्य खातों में भेज दी जाती थी। जांच में कई ऐसे चेक भी मिले जो बंद खातों से जुड़े थे या जिनका संबंधित ग्राहकों से कोई संबंध नहीं था। इस तरीके से आरोपी ने करोड़ों रुपये की हेराफेरी की।

गिरफ्तारी से बचने के लिए बदलता रहा ठिकाने
मामला सामने आने के बाद आरोपी लगातार फरार चल रहा था। अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर रखा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में अपने ठिकाने बदलता रहा। उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई पते और संपर्क विवरण भी बदलने की कोशिश की, लेकिन EOW की टीम लगातार उसकी तलाश में जुटी रही।
राजस्थान के ब्यावर से हुई गिरफ्तारी
तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर EOW ने आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। 18 जून 2026 को राजस्थान के ब्यावर स्थित टिकराना गुर्जर क्षेत्र से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस घोटाले में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच में हो सकते हैं बड़े खुलासे
पुलिस का मानना है कि पूछताछ के दौरान इस वित्तीय घोटाले से जुड़े कई अन्य नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी ने अकेले इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। EOW मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।

