बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब घटना को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में लगातार सवाल उठ रहे हैं।
सरेंडर के दावे ने बढ़ाए सवाल
अभिषेक मनु सिंघवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यदि कोई व्यक्ति कैमरे पर आत्मसमर्पण करता हुआ दिखाई देता है और बाद में उसकी मुठभेड़ में मौत हो जाती है, तो सरकार की जवाबदेही और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल आधिकारिक बयान पर्याप्त नहीं होते, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जरूरी होती है ताकि जनता के सामने सच्चाई आ सके।

कानून की प्रक्रिया पर दिया जोर
सिंघवी ने कहा कि लोकतंत्र में कानून का शासन केवल अपराधियों को सजा देने तक सीमित नहीं है। इसकी असली परीक्षा इस बात से होती है कि हर व्यक्ति के साथ कानूनी प्रक्रिया का पालन कितनी ईमानदारी और पारदर्शिता से किया जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले में न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान और निष्पक्ष जांच ही जनता का विश्वास बनाए रख सकती है।
बिहार सरकार ने किया न्यायिक जांच का ऐलान
मामले को लेकर बढ़ते विवाद के बीच बिहार सरकार ने भी बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि यह जांच उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में होगी, ताकि घटना के हर पहलू की निष्पक्ष पड़ताल सुनिश्चित की जा सके।
क्या है पूरा मामला?
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की बुधवार को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो और दावों के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।

