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Tuesday, July 21, 2026
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FIITJEE मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती, ED ने वेबसाइट से हटाई विवादित प्रेस रिलीज

FIITJEE और उसके अधिकारियों से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई ने जांच एजेंसियों की सार्वजनिक संचार प्रणाली पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत की कड़ी टिप्पणियों के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी वेबसाइट से एक विवादित प्रेस रिलीज हटाने का फैसला किया है। यह मामला अब केवल जांच तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और मीडिया में साझा की जाने वाली सूचनाओं की मर्यादा पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

प्रेस रिलीज से शुरू हुआ विवाद

पूरा विवाद अप्रैल 2025 में जारी एक प्रेस रिलीज से जुड़ा है। ED के लखनऊ जोनल कार्यालय ने FIITJEE से संबंधित परिसरों पर की गई तलाशी के बाद एक बयान जारी किया था। FIITJEE का आरोप था कि उस प्रेस रिलीज में ऐसे निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए, जो अभी तक किसी न्यायिक प्रक्रिया में साबित नहीं हुए थे। संस्थान ने इसे अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया।

हाईकोर्ट ने उठाए गंभीर प्रश्न

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जांच एजेंसियों को मीडिया को जानकारी देने का अधिकार है, लेकिन उन्हें अपनी सीमाओं का पालन करना होगा। अदालत ने कहा कि किसी भी जांच के दौरान साझा की जाने वाली जानकारी तथ्यों तक सीमित होनी चाहिए और उसे ऐसा रूप नहीं दिया जाना चाहिए जिससे किसी व्यक्ति या संस्था को पहले से दोषी माना जाए।

FIITJEE मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती, ED ने वेबसाइट से हटाई विवादित प्रेस रिलीज

2010 की गाइडलाइन का उल्लेख

कोर्ट ने गृह मंत्रालय द्वारा जारी 2010 की गाइडलाइन का भी हवाला दिया। इन दिशा-निर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जांच एजेंसियां मीडिया से बातचीत करते समय ऐसी भाषा का प्रयोग न करें जिससे आरोपी के दोषी होने का आभास मिले। अदालत ने संकेत दिया कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी भी प्रकार का निर्णयात्मक बयान उचित नहीं माना जा सकता।

क्या होता है ‘Judgmental Aspersion’?

कानूनी भाषा में ‘Judgmental Aspersion’ का अर्थ ऐसे बयान से है जो अदालत के अंतिम निर्णय से पहले ही किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराने का संकेत देता हो। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच और आरोपों की जानकारी देना अलग बात है, जबकि दोष सिद्ध होने जैसा संदेश देना न्यायिक सिद्धांतों के विपरीत माना जाता है।

कोर्ट के सवालों के बाद ED का फैसला

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ED से पूछा कि क्या वह विवादित प्रेस रिलीज में संशोधन करना चाहती है या अदालत इस मामले पर विस्तृत सुनवाई करे। इसके बाद ED ने अदालत को सूचित किया कि वह बिना किसी शर्त के उक्त प्रेस रिलीज को अपनी वेबसाइट से हटा देगी।

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