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Tuesday, July 21, 2026
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आजमगढ़ में सपा को चुनौती देने निकले ओमप्रकाश राजभर के बेटे

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव अभी भले ही दूर हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने चुनावी मैदान में अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए 32 विधानसभा सीटों पर दावेदारी पेश कर दी है। पार्टी का दावा है कि वह जमीनी स्तर पर लगातार काम कर रही है और पूर्वांचल में अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी है। सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर ने कहा कि पार्टी एनडीए के भीतर सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहती है और इस संबंध में अपनी बात गठबंधन नेतृत्व तक पहुंचा चुकी है। राजनीतिक गलियारों में इस मांग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं क्योंकि सीटों की यह संख्या सुभासपा की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को दर्शाती है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन के भीतर कई दौर की बातचीत हो सकती है।

समाजवादी पार्टी के गढ़ आजमगढ़ पर सुभासपा की नजर

सुभासपा ने इस बार अपनी रणनीति का केंद्र समाजवादी पार्टी के मजबूत गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ को बनाया है। अरुण राजभर ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी पार्टी का लक्ष्य आजमगढ़ क्षेत्र में राजनीतिक पकड़ मजबूत करना और वहां एनडीए को बढ़त दिलाना है। उन्होंने बताया कि अतरौलिया, मेहनगर और दीदारगंज जैसी विधानसभा सीटों पर पार्टी ने अपनी दावेदारी पेश की है। खुद अरुण राजभर ने भी संकेत दिए हैं कि वह अतरौलिया विधानसभा सीट से एनडीए उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आजमगढ़ लंबे समय से समाजवादी पार्टी का प्रभाव क्षेत्र रहा है, इसलिए यहां चुनौती देना आसान नहीं होगा। हालांकि सुभासपा का मानना है कि पूर्वांचल में उसके बढ़ते जनाधार और संगठनात्मक मजबूती के कारण वह इस बार बड़ा राजनीतिक बदलाव लाने में सफल हो सकती है।

आजमगढ़ में सपा को चुनौती देने निकले ओमप्रकाश राजभर के बेटे

एनडीए नेतृत्व के फैसले पर टिकी निगाहें

सुभासपा की इस मांग के बाद अब सबकी नजर एनडीए नेतृत्व पर टिक गई है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने कहा है कि गठबंधन में सीटों का फैसला आपसी सहमति और सभी सहयोगी दलों से चर्चा के बाद किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव के समय एनडीए का शीर्ष नेतृत्व सभी सहयोगियों के साथ बैठकर अंतिम निर्णय लेगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सुभासपा को कितनी सीटें मिलती हैं और उसकी मांग को कितना महत्व दिया जाता है। गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में सुभासपा समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में थी और उसने 19 सीटों पर चुनाव लड़कर 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि चुनाव के कुछ समय बाद ही पार्टी ने सपा से दूरी बना ली और दोबारा एनडीए का हिस्सा बन गई। इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में भी सुभासपा एनडीए के साथ थी और उसे 8 सीटें मिली थीं, जिनमें से चार पर जीत हासिल हुई थी।

अखिलेश यादव के PDA को चुनौती देने की रणनीति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले सुभासपा और उसके अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं। अरुण राजभर ने दावा किया है कि इस बार समाजवादी पार्टी को पूर्वांचल में कड़ी चुनौती मिलेगी। वहीं ओमप्रकाश राजभर लगातार समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर हमलावर बने हुए हैं। विश्लेषकों के अनुसार अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक समीकरण को कमजोर करने के लिए एनडीए की तरफ से राजभर सबसे सक्रिय नेताओं में दिखाई दे रहे हैं। वह पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ हिंदुत्व के मुद्दों को भी प्रमुखता दे रहे हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती नजर आ रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में उनकी यह रणनीति कितना असर दिखाती है और क्या सुभासपा वास्तव में समाजवादी पार्टी के मजबूत गढ़ों में सेंध लगाने में सफल हो पाती है।

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