महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर राजनीतिक उठापटक की आहट सुनाई देने लगी है। पिछले कुछ दिनों से ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चल रही चर्चाओं ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। इसी बीच शिवसेना (UBT) प्रमुख Uddhav Thackeray ने रविवार को अपने सभी सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। यह बैठक मुंबई स्थित ठाकरे परिवार के निवास ‘मातोश्री’ में आयोजित की गई, जहां पार्टी के वर्तमान राजनीतिक हालात और सांसदों की स्थिति पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में यह बैठक इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde के संपर्क में हैं। ऐसे में उद्धव ठाकरे की यह बैठक पार्टी को एकजुट रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। महाराष्ट्र की सियासत में इस बैठक को लेकर काफी उत्सुकता बनी हुई है।
कई सांसद पहुंचे, कुछ ने ऑनलाइन जुड़कर दिया संदेश
मातोश्री में आयोजित इस बैठक में पार्टी के कई सांसदों ने प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया, जबकि कुछ सांसद ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख और हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर ने वर्चुअल रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं दक्षिण मुंबई से सांसद अरविंद सावंत, नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे, मुंबई दक्षिण मध्य से सांसद अनिल देसाई और मुंबई उत्तर-पूर्व से सांसद संजय दिना पाटिल बैठक में मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार बैठक में पार्टी की वर्तमान रणनीति, सांसदों के संपर्क और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा की जा रही है। पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी प्रकार की अटकलों या अफवाहों से संगठन की एकता प्रभावित न हो। इसी वजह से सभी सांसदों से सीधे संवाद स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।

तीन सांसदों की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई अटकलें
बैठक के दौरान कुछ सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया। शिर्डी से सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे और परभणी से सांसद संजय जाधव की मौजूदगी को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। बताया जा रहा है कि वाकचौरे पिछले दो दिनों से परिवार के साथ कहीं बाहर हैं और उनका फोन भी लगातार बंद बताया जा रहा है। वहीं सांसद ओमराजे निंबालकर पहले ही पार्टी नेतृत्व को सूचित कर चुके थे कि उनके बेटे की तबीयत खराब है और वह पुणे के एक अस्पताल में भर्ती है, इसलिए वे बैठक में शामिल नहीं हो पाए। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में कुछ सांसदों की गैरमौजूदगी स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करती है। यही कारण है कि बैठक से जुड़े हर घटनाक्रम पर मीडिया और राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा के पीछे क्या है सियासी गणित?
दरअसल हाल के दिनों में शिंदे गुट की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि शिवसेना (UBT) के कई सांसद उनके संपर्क में हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि लोकसभा चुनाव में जीतकर आए नौ सांसदों में से सात सांसद पाला बदल सकते हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन्हीं अटकलों ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा को जन्म दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महाराष्ट्र में पिछले कुछ वर्षों से लगातार दल-बदल और राजनीतिक पुनर्संरचना देखने को मिली है, इसलिए ऐसी खबरें तेजी से चर्चा का विषय बन जाती हैं। उद्धव ठाकरे की यह बैठक इसी पृष्ठभूमि में बेहद अहम मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि बैठक के बाद पार्टी नेतृत्व क्या संदेश देता है और क्या इन अटकलों पर विराम लग पाता है या महाराष्ट्र की राजनीति में कोई नया मोड़ सामने आता है।

