हरियाणा में नए राज्य सूचना आयुक्त के तौर पर Ajay Sura की नियुक्ति के बाद अब उन नामों का खुलासा किया गया है जिन्होंने इस प्रतिष्ठित पद के लिए आवेदन किया था। सरकार द्वारा सार्वजनिक की गई सूची ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। जानकारी के मुताबिक राज्य सूचना आयोग में सदस्य बनने के लिए कुल 349 लोगों ने दावेदारी पेश की थी। इनमें सेवानिवृत्त आईएएस. आईपीएस. आईआरएस और एचसीएस अधिकारियों के अलावा कई पत्रकार. समाजसेवी. वकील और विभिन्न क्षेत्रों के चर्चित लोग शामिल रहे। इस खुलासे के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि सूचना आयोग के पदों को लेकर पर्दे के पीछे किस स्तर पर प्रतिस्पर्धा चल रही थी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आना इस बात का संकेत है कि आयोग के पद अब केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रभावशाली संस्थागत भूमिका के रूप में भी देखे जा रहे हैं।
पूर्व अफसरों और चर्चित चेहरों ने भी ठोकी दावेदारी
सूचना आयुक्त बनने की इस दौड़ में कई बड़े और चर्चित नाम शामिल रहे। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के पूर्व चेयरमैन भोपाल सिंह खदरी और हरियाणा लोकसेवा आयोग की पूर्व सदस्य Vandana Sharma भी इस सूची में शामिल थीं। वंदना शर्मा पूर्व केंद्रीय मंत्री Sushma Swaraj की छोटी बहन हैं और भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ चुकी हैं। इसके अलावा 18 सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने भी आवेदन किया था जिनमें कई पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह शामिल रहे। चार सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारियों और एक आईआरएस अधिकारी ने भी इस पद के लिए दावा पेश किया। हालांकि सरकार ने साफ किया कि 39 आवेदन निर्धारित समय सीमा के बाद पहुंचे थे इसलिए उन पर विचार नहीं किया गया। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 21 मार्च 2025 तय की गई थी। अब संभावना जताई जा रही है कि आयोग में खाली पड़े बाकी पदों के लिए सरकार जल्द फिर से आवेदन मांग सकती है।

आयोग में अभी भी खाली हैं पांच अहम पद
नए सूचना आयुक्त अजय सूरा के पदभार संभालने के बावजूद राज्य सूचना आयोग में अभी पांच पद खाली पड़े हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत राज्य स्तर पर एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम दस सूचना आयुक्त नियुक्त किए जा सकते हैं। फिलहाल आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त TVSN Prasad समेत पांच सदस्य कार्यरत हैं। पिछले साल हरियाणा सरकार ने सात सूचना आयुक्तों और एक मुख्य सूचना आयुक्त के पदों के लिए आवेदन मांगे थे। इसके बाद मई 2025 में टीवीएसएन प्रसाद को मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया था। उनके साथ अमरजीत सिंह. कर्मवीर सैनी. नीता खेड़ा. संजय मदान और प्रियंका धूपड़ को सूचना आयुक्त बनाया गया था। हालांकि प्रियंका धूपड़ की नियुक्ति विवादों में घिर गई और उन्होंने पदभार नहीं संभाला। वहीं अप्रैल में डॉ. कुलबीर छिकारा और डॉ. जगबीर सिंह का कार्यकाल पूरा हो गया जिससे आयोग में खाली पदों की संख्या और बढ़ गई।
पारदर्शिता और नियुक्तियों पर उठने लगे सवाल
सरकार द्वारा नाम सार्वजनिक किए जाने के बाद अब नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है। कई लोग इसे पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं जबकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में अनुभवी अधिकारियों और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों के आवेदन आने के बावजूद चयन प्रक्रिया को और ज्यादा खुला बनाया जाना चाहिए। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि क्या सरकार पुराने आवेदनों में शामिल नामों पर ही विचार करेगी या फिर नई प्रक्रिया शुरू होगी। आयोग में रिक्त पदों को लेकर विपक्ष भी सरकार पर सवाल उठा सकता है क्योंकि सूचना आयोग को पारदर्शिता और जवाबदेही का अहम संस्थान माना जाता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन खाली पदों को भरने के लिए कौन सा रास्ता अपनाती है और किन नामों पर अंतिम मुहर लगती है।

