उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नमाज को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है. अब इस मुद्दे पर बिहार की सत्तारूढ़ पार्टी जनता दल यूनाइटेड की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है. जेडीयू कोटे से बिहार सरकार में मंत्री जमा खान ने कहा कि देश संविधान और कानून से चलता है और हर काम कानून के दायरे में ही होना चाहिए. उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है. विभिन्न दल अपने अपने तरीके से इस मामले पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और इसे राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है.
जमा खान ने क्या कहा और क्या दिया संदेश
जमा खान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को लेकर कहा कि संभवतः उनका मतलब यह रहा होगा कि किसी भी व्यवस्था को कानून के तहत लागू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि नमाज साफ सुथरी जगह पर पढ़नी चाहिए और सड़क के अलावा दूसरी जगहों पर भी नमाज अदा की जा सकती है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सड़क पर भी कुछ परिस्थितियों में लोग नमाज पढ़ लेते हैं लेकिन इस तरह की बातों से समाज का माहौल खराब नहीं होना चाहिए. उन्होंने लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की और कहा कि धार्मिक मामलों को विवाद का रूप नहीं देना चाहिए. उनके बयान को संतुलित प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है.

बिहार सरकार और नीतीश कुमार पर भी दिया बयान
जमा खान ने इस दौरान आनंद मोहन के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम कर रही है. उन्होंने कहा कि बिहार सरकार आज भी नीतीश कुमार के निर्देशों पर ही चल रही है और पार्टी के सभी नेता उनके नेतृत्व में विश्वास रखते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से कोई फैसला लेता है तो वह उसका व्यक्तिगत निर्णय होता है. इस बयान के जरिए जेडीयू ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी में नेतृत्व को लेकर कोई भ्रम नहीं है और सरकार पूरी मजबूती के साथ चल रही है.
नमाज पर योगी आदित्यनाथ का बयान और जारी विवाद
दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अगर नमाज पढ़नी है तो लोग शिफ्ट में पढ़ें लेकिन सड़क पर नमाज नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सड़कें आवागमन के लिए होती हैं और किसी को भी उन्हें रोकने का अधिकार नहीं है. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सरकार नमाज का विरोध नहीं कर रही लेकिन सार्वजनिक रास्तों को बाधित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोग समझाने से मानेंगे तो ठीक है अन्यथा सरकार दूसरा तरीका अपनाएगी. इसी बयान के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं और यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गया है.

