पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के चुनाव परिणामों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी अब पूरी मजबूती के साथ अपने गठबंधन सहयोगियों राष्ट्रीय लोकदल यानी RLD, निषाद पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी यानी SBSP और अपना दल सोनलाल को स्पष्ट संदेश दे रही है कि पार्टी अब किसी दबाव में काम नहीं करेगी। बीजेपी का फोकस अब सीधे अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की पकड़ को और मजबूत करने पर है। यह बदलाव यूपी की राजनीति में आने वाले समय में बड़े राजनीतिक संकेत दे रहा है।
बीजेपी की नई रणनीति और गठबंधन पर संतुलन
हाल ही में हुए योगी कैबिनेट विस्तार में भी बीजेपी की इस नई रणनीति की झलक साफ दिखाई दी। पार्टी एक तरफ जहां अपने संगठन को मजबूत कर रही है वहीं दूसरी तरफ गठबंधन की राजनीति को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं कर रही है। बीजेपी का लक्ष्य PDA यानी पिछड़े दलित और आदिवासी वर्गों के वोट बैंक में सेंध लगाना है। इसके लिए पार्टी अपने मित्र दलों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखते हुए राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। यह रणनीति 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।

RLD और निषाद पार्टी की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता
राष्ट्रीय लोकदल जिसने 2024 लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के साथ गठबंधन किया था और जिसके पास नौ विधायक हैं अब पश्चिमी यूपी में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। पार्टी के अध्यक्ष जयंत चौधरी केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं और वह जाट मुस्लिम और ब्राह्मण वोट बैंक को साधने में जुटे हैं। वहीं निषाद पार्टी भी पूर्वांचल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार रैलियां कर रही है। पार्टी प्रमुख संजय निषाद और उनके बेटे प्रवीण निषाद संगठन को विस्तार देने में लगे हैं जिससे गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर नई मांगें भी सामने आ रही हैं।
SBSP और अपना दल की रणनीति और अंदरूनी समीकरण
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर भी कैबिनेट मंत्री हैं और वह लगातार अपने राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने ब्राह्मण समुदाय के बीच रैलियां कर अपने जनाधार को व्यापक बनाने का प्रयास किया है। वहीं अपना दल सोनलाल जिसकी पूर्वांचल में मजबूत पकड़ है और जिसके पास तेरह विधायक हैं वह भी अधिक मंत्री पद की मांग कर रहा है लेकिन हाल के विस्तार में उसे कोई अतिरिक्त मौका नहीं मिला। इसके बावजूद पार्टी 2027 चुनावों के लिए बूथ स्तर पर मजबूत रणनीति तैयार कर रही है और बीजेपी भी अपने स्तर पर समुदाय आधारित नेतृत्व को आगे बढ़ाकर गठबंधन पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।

