उत्तर प्रदेश की कैबिनेट का आज दूसरी बार विस्तार होने जा रहा है, जिसमें दोपहर 3 बजे 6 नए मंत्री शपथ ग्रहण करेंगे। यह विस्तार राजनीतिक और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में होने वाले इस फेरबदल को 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। शपथ ग्रहण समारोह लखनऊ में आयोजित किया जाएगा, जिसमें राज्यपाल भी उपस्थित रहेंगे।
जातीय संतुलन के आधार पर मंत्रिमंडल में नए चेहरे
इस विस्तार में जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है। नए मंत्रियों में एक ब्राह्मण, तीन ओबीसी और दो दलित चेहरे शामिल किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य सभी प्रमुख वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर राजनीतिक संतुलन साधना है। यह कदम आगामी चुनावों में व्यापक सामाजिक समर्थन हासिल करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे विभिन्न समुदायों को साधने की कोशिश की गई है।

नए मंत्रियों की सूची और राजनीतिक पृष्ठभूमि
इस कैबिनेट विस्तार में जिन नेताओं को जगह मिली है उनमें भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडे, कृष्णा पासवान, हंसराज विश्वकर्मा, कैलाश राजपूत और सुरेंद्र दिलेर शामिल हैं। भूपेंद्र चौधरी जाट समाज से आने वाले वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। मनोज पांडे सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए ब्राह्मण नेता हैं। कृष्णा पासवान दलित समाज की मजबूत महिला चेहरा हैं, जबकि हंसराज विश्वकर्मा संगठन से जुड़े जमीनी कार्यकर्ता हैं। कैलाश राजपूत और सुरेंद्र दिलेर भी ओबीसी और दलित समाज से आते हैं, जिनकी क्षेत्रीय पकड़ मजबूत मानी जाती है।
संगठन और युवा नेतृत्व को मिलेगा नया विस्तार
यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल राजनीतिक संतुलन तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनात्मक मजबूती और युवा नेतृत्व को आगे लाने का भी प्रयास है। कई नए मंत्रियों की उम्र अपेक्षाकृत कम है, जिससे सरकार में ऊर्जा और नए विचारों का समावेश होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस शपथ ग्रहण समारोह के बाद लोकभवन में एक विशेष कार्यक्रम में भी शामिल होंगे, जहां वे एक फिल्म स्क्रीनिंग में राज्यपाल और अन्य मंत्रियों के साथ भाग लेंगे। यह विस्तार आने वाले चुनावों के लिए भाजपा की बड़ी रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

