बिहार में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान दामोदर रावत ने शपथ लेते ही जमुई जिले की राजनीति में नया रिकॉर्ड कायम कर दिया। वे जिले के पहले ऐसे नेता बन गए हैं जिन्होंने पांचवीं बार मंत्री पद की शपथ ली है। इस उपलब्धि ने उन्हें जिले के राजनीतिक इतिहास में एक विशेष स्थान दिला दिया है और स्थानीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बना दिया है।
चार बार के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नई उपलब्धि
इससे पहले जमुई जिले में पूर्व मंत्री स्वर्गीय नरेंद्र सिंह और दामोदर रावत चार-चार बार मंत्री पद की शपथ लेकर बराबरी पर थे। लेकिन अब दामोदर रावत ने पांचवीं बार शपथ लेकर इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि कार्यकाल की अवधि के मामले में नरेंद्र सिंह अभी भी आगे माने जाते हैं, जिन्होंने लंबे समय तक राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

राजनीतिक सफर और लंबे अनुभव की कहानी
दामोदर रावत ने पहली बार वर्ष 2007 में मंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद वे 2010, 2014, 2015 और अब 2026 में फिर से मंत्री बने हैं। उनका यह लगातार राजनीतिक सफर यह दर्शाता है कि वे लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। गुरुवार को हुए शपथ ग्रहण के साथ ही उन्होंने जमुई जिले के अन्य सभी नेताओं को मंत्री पद की संख्या के मामले में पीछे छोड़ दिया।
जमुई की राजनीति में नई पीढ़ी और लगातार बढ़ता प्रभाव
जमुई जिले की राजनीति में कई प्रमुख नेताओं का योगदान रहा है। नरेंद्र सिंह के पुत्र सुमित कुमार सिंह भी राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं और लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वहीं हाल ही में मंत्री बनीं श्रेयसी सिंह भी इस सूची में शामिल हो गई हैं। जमुई से पहली बार मंत्री बनने का गौरव रामेश्वर पासवान को 1969 में मिला था। अब दामोदर रावत की उपलब्धि ने जिले की राजनीति को एक नया आयाम दे दिया है।

