उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव में अब करीब सात महीने का ही समय बचा है, लेकिन कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह लगातार गहराती जा रही है। पार्टी में गुटीय खींचतान और वर्चस्व की जंग अब खुलकर सामने आने लगी है, जिससे संगठनात्मक कामकाज प्रभावित हो रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल को हटाने से जुड़े कथित प्रकरण ने इस विवाद को और हवा दे दी है। इसके चलते नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन जैसे अहम फैसले भी अटकते नजर आ रहे हैं।
नेतृत्व विवाद से संगठनात्मक फैसले ठप, हाईकमान की चिंता बढ़ी
कांग्रेस हाईकमान ने पिछले चुनावों में लगातार हार के बाद संगठन को मजबूत करने के लिए कई बदलाव किए थे। नवंबर में गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि प्रीतम सिंह को चुनाव अभियान समिति और हरक सिंह रावत को चुनाव प्रबंधन समिति की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि इन बदलावों के बावजूद संगठन में अपेक्षित एकजुटता नहीं बन पाई। अब चुनाव नजदीक आने के बावजूद कार्यकारिणी का गठन लंबित है, जिससे पार्टी की रणनीति पर असर पड़ रहा है।

आरोपों और ऑडियो विवाद से और बढ़ा सियासी तनाव
पार्टी के भीतर हालिया विवाद तब और गहरा गया जब एक महिला नेत्री ने प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को लेकर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि वह सीधे तौर पर कांग्रेस से जुड़ी नहीं हैं, लेकिन पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से उनके संबंध बताए जाते हैं। इसके अलावा कुछ कथित ऑडियो क्लिप सामने आने की चर्चा ने मामले को और जटिल बना दिया है। इस पूरे घटनाक्रम को पार्टी के भीतर नेतृत्व पर नियंत्रण की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है, जिससे संगठन की छवि पर भी असर पड़ रहा है।
चुनावी चुनौती के बीच एकजुटता की कमी बनी सबसे बड़ी चिंता
कांग्रेस के सामने उत्तराखंड में भाजपा के मजबूत गढ़ को चुनौती देने की बड़ी जिम्मेदारी है। हाईकमान लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि सभी वरिष्ठ नेता एकजुट होकर चुनावी रणनीति तैयार करें, लेकिन अंदरूनी खींचतान इस प्रयास को कमजोर कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की चर्चा और लगातार विवादों के चलते पार्टी में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। ऐसे समय में जब चुनाव नजदीक हैं, संगठनात्मक कमजोरियां कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही हैं।

